डिंडौरी मध्यप्रदेश 

रिपोर्ट अखिलेश झारिया 

 

*कुटरई पंचायत में पटाखा बिल पर घमासान, मटेरियल सप्लायर के भुगतान ने खड़े किए कई सवाल*

 

 

गिट्टी-रेत सप्लायर के बिल पर दर्शाई गई पटाखों की खरीदी, लाइसेंस से लेकर ऑडिट और भुगतान प्रक्रिया तक जांच की मांग तेज

 

डिंडौरी/मेहंदवानी। जनपद पंचायत मेहंदवानी अंतर्गत ग्राम पंचायत कुटरई के वर्ष 2023-24 के वित्तीय अभिलेखों में सामने आए एक बिल ने पंचायतों की वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के अनुसार “मां नर्मदा मटेरियल सप्लायर, मेहंदवानी” के नाम से लगभग 4,440 रुपये के पटाखों की खरीदी का भुगतान दर्ज किया गया है।

 

मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि जिस लेटरहेड पर बिल जारी किया गया है, उसमें व्यवसाय के रूप में रेत, गिट्टी, सीमेंट, मुरूम, पत्थर, बोल्डर, दरवाजे-खिड़कियां एवं अन्य निर्माण सामग्री की सप्लाई का उल्लेख है। ऐसे में निर्माण सामग्री सप्लायर द्वारा पटाखों की बिक्री दर्शाए जाने से खरीदी और भुगतान की वैधता पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित व्यापारी वास्तव में पटाखों का विक्रय करता है तो उसके पास विस्फोटक सामग्री के भंडारण एवं विक्रय का वैध लाइसेंस होना चाहिए। साथ ही जीएसटी पंजीयन और व्यापारिक अभिलेखों में भी ऐसे व्यवसाय का स्पष्ट उल्लेख होना आवश्यक है। ग्रामीणों ने संबंधित बिल, लाइसेंस और जीएसटी रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।

 

*पटाखों की खरीदी का उद्देश्य बना जांच का विषय*

 

ग्रामीणों का सवाल है कि ग्राम पंचायत कोटरई ने आखिर किस उद्देश्य से पटाखों की खरीदी की। पंचायत निधि का उपयोग सामान्यतः विकास कार्यों, सार्वजनिक सुविधाओं तथा शासन द्वारा स्वीकृत गतिविधियों के लिए किया जाता है। ऐसे में यह भुगतान किस मद से किया गया और किस प्रस्ताव के आधार पर इसकी स्वीकृति दी गई, इसकी जांच आवश्यक बताई जा रही है।

 

*जनपद पंचायत की भूमिका पर भी उठे सवाल*

 

मामला केवल ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं है। पंचायतों के वित्तीय भुगतान विभिन्न प्रशासनिक स्तरों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में यह प्रश्न भी उठ रहा है कि बिल में पटाखों का स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद जनपद पंचायत स्तर पर दस्तावेजों की जांच के दौरान इस पर आपत्ति क्यों नहीं की गई। यदि सत्यापन हुआ था तो भुगतान की स्वीकृति किन आधारों पर प्रदान की गई।

 

*ऑडिट और सामाजिक अंकेक्षण की प्रभावशीलता पर प्रश्न*

 

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों का प्रतिवर्ष विभागीय ऑडिट किया जाता है। इसके अलावा सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से ग्राम सभाओं में खर्चों और कार्यों की समीक्षा भी होती है। इसके बावजूद यदि ऐसे बिल अभिलेखों में मौजूद रहे, तो संबंधित ऑडिट अधिकारियों और सामाजिक अंकेक्षण दलों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

 

लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेजों की गंभीरता से जांच की जाती तो इस प्रकार की प्रविष्टियों पर समय रहते आपत्ति दर्ज की जा सकती थी।

 

*स्वतंत्र जांच की मांग तेज*

 

मामला उजागर होने के बाद ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ग्राम पंचायत कोटरई के वित्तीय अभिलेखों, भुगतान आदेशों, वाउचरों, जीएसटी दस्तावेजों तथा ऑडिट रिपोर्ट की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान नियमानुसार किया गया था या किसी स्तर पर लापरवाही अथवा अनियमितता हुई है।

 

*सीईओ का पक्ष नहीं मिला*

 

इस संबंध में जनपद पंचायत मेहंदवानी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे चर्चा नहीं हो सकी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 

*सवाल जो जवाब मांग रहे हैं*

 

• ग्राम पंचायत ने पटाखों की खरीदी किस उद्देश्य से की?

• क्या पंचायत निधि से ऐसा भुगतान नियमानुसार किया गया?

• संबंधित सप्लायर के पास पटाखा विक्रय का वैध लाइसेंस है या नहीं?

• जीएसटी रिकॉर्ड में पटाखा विक्रय का उल्लेख दर्ज है या नहीं?

• जनपद पंचायत ने भुगतान से पहले दस्तावेजों का सत्यापन किया था या नहीं?

• विभागीय ऑडिट और सामाजिक अंकेक्षण के दौरान इस बिल पर आपत्ति क्यों नहीं उठाई गई?

• क्या जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?

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