डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
डिवाइडर निर्माण के बाद बिगड़ी आवागमन व्यवस्था; स्कूल-आश्रम तक पहुंचने में बच्चों को परेशानी, फिसलने का भी खतरा
डिंडौरी जिले के शहपुरा नगर में विकास कार्यों के बीच स्कूली बच्चों की राह मुश्किल होती नजर आ रही है। डिवाइडर निर्माण के बाद सड़क और उसके किनारे आवागमन की व्यवस्था प्रभावित होने से बारिश में कई स्थानों पर रास्ता कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो गया है। हालात ऐसे हैं कि छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल बैग लेकर कीचड़ और पत्थरों के बीच संभल-संभलकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। सामने आई तस्वीरें भी रास्ते की बदहाल स्थिति और बच्चों को हो रही परेशानी को बयां कर रही हैं।

बताया जा रहा है कि इस मार्ग का उपयोग बृहद कन्या आश्रम, अंग्रेजी माध्यमिक शाला और शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सहित आसपास के आश्रम-छात्रावासों में आने-जाने वाले विद्यार्थी करते हैं। बारिश के बाद रास्ते में पानी और कीचड़ जमा होने से सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों को उठानी पड़ रही है। कहीं बच्चों को पत्थरों पर पैर रखकर निकलना पड़ रहा है तो कहीं फिसलन भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में गिरने और चोट लगने की आशंका भी बनी रहती है।
विकास का काम, लेकिन बच्चों की राह का क्या?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि डिवाइडर निर्माण से पहले सड़क चौड़ीकरण और निर्माण अवधि के दौरान सुरक्षित आवागमन की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए थी। निर्माण के साथ यदि सड़क किनारे के हिस्सों और संपर्क मार्गों को व्यवस्थित रखा जाता तो आज स्कूली बच्चों और नागरिकों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
लोगों का सवाल है कि नगर के प्रमुख मार्ग पर निर्माण कार्य करते समय स्कूल, छात्रावास और अन्य सार्वजनिक संस्थानों तक सुरक्षित पहुंच की जरूरत को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। बारिश ने समस्या को और बढ़ा दिया है और सड़क का कच्चा हिस्सा कई जगह कीचड़ में बदल गया है।
डिवाइडर निर्माण की योजना और व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिक डिवाइडर निर्माण के साथ सड़क की चौड़ाई और निर्माण कार्य के दौरान की गई यातायात व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। कुछ लोगों द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण कर स्थिति और निर्माण संबंधी तथ्यों को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों से समाधान की उम्मीद
स्थानीय लोगों के मुताबिक समस्या की ओर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कराया गया है, लेकिन कीचड़ और बदहाल रास्ते से फिलहाल राहत नहीं मिल सकी है। सबसे बड़ी चिंता उन नौनिहाल बच्चों की है, जिन्हें मौसम कैसा भी हो, इसी रास्ते से रोज स्कूल जाना है।
नागरिकों ने नगर परिषद और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि स्कूल एवं छात्रावास की ओर जाने वाले रास्ते से तत्काल कीचड़ हटवाकर समतलीकरण कराया जाए और बारिश के दौरान सुरक्षित आवागमन की अस्थायी व्यवस्था की जाए। साथ ही निर्माण कार्य पूरा होने तक ऐसे रास्तों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि बच्चों और आम नागरिकों को जोखिम उठाकर आवागमन न करना पड़े।
अब सवाल यह है कि नगर में विकास के नाम पर चल रहे निर्माण कार्यों के बीच नौनिहालों की सुरक्षित राह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा और यह बदहाल रास्ता कब सुधरेगा?







