भव्य संगीत समारोह में स्थानीय एवं अंचल के कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुतियां, संगीत प्रेमियों ने जमकर सराहा
राजिम। संगीत और कला के क्षेत्र में एक वर्ष की सफल एवं यादगार यात्रा पूर्ण करने पर कला मंच राजिम द्वारा प्रथम वर्षगांठ समारोह का भव्य आयोजन किया गया। सुरों से सजे इस समारोह में क्षेत्रभर के कलाकारों, संगीत प्रेमियों एवं कला अनुरागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कलाकारों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने देर तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किए रखा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पालिका परिषद राजिम के अध्यक्ष श्री महेश यादव रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री सुबोध फ्रेंकलिन, श्री हरीश ठक्कर, डॉ. आनंद गुप्ता, श्री उत्तम पवार, श्री संजय ठाकुर, श्री रामकरण त्रिवेदी एवं श्री विजय सिन्हा उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ समारोह का शुभारंभ किया।
स्वागत उद्बोधन में कला मंच के दिनेश्वर साहू ने मंच की एक वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कला मंच राजिम कलाकारों एवं संगीत प्रेमियों को एक सूत्र में जोड़ने के साथ क्षेत्र के सांस्कृतिक वातावरण को समृद्ध करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। वहीं अधिवक्ता आशीष शिंदे ने मंच के उद्देश्यों एवं उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त मंच उपलब्ध कराना ही कला मंच का प्रमुख उद्देश्य है।
मुख्य अतिथि श्री महेश यादव ने कला मंच को प्रथम वर्षगांठ की बधाई देते हुए कहा कि संगीत समाज को जोड़ने और प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम है। स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देना सराहनीय पहल है। उन्होंने कला मंच के उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर प्रगति की शुभकामनाएं दीं।
समारोह में राजिम, रायपुर, गरियाबंद, राजनांदगांव, छुरा एवं फिंगेश्वर सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सुमधुर गीत एवं संगीतमय प्रस्तुतियां देकर ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पुराने सदाबहार गीतों सहित विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन आशीष राव शिंदे एवं किशोर निर्मलकर ने किया। अंत में किशोर निर्मलकर ने अतिथियों, कलाकारों, सहयोगियों, पत्रकार बंधुओं एवं समस्त संगीत प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कला मंच राजिम की यह प्रथम वर्षगांठ केवल एक वर्ष की उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कला एवं संगीत की प्रतिभाओं को नई पहचान और नई उड़ान देने के संकल्प का उत्सव बन गई।
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद
