कटनी में गेहूं खरीदी का नर्क द्वार 6 किलोमीटर लंबी कतार, 3 दिन का इंतजार और सिस्टम से हताश अन्नदाता
कटनी
कटनी | मध्य प्रदेश में इन दिनों गेहूं खरीदी का उत्सव दावों में तो चमक रहा है, लेकिन हकीकत की जमीन पर यह उत्सव किसानों के लिए यातना बन चुका है। कटनी जिला सैलो पटोरी खरीदी केंद्र का नजारा सरकार के सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा रहा था। खुले आसमान के नीचे, तपती सड़क पर खड़ी हजारों ट्रैक्टर-ट्रालियां किसी मंडी का दृश्य नहीं, बल्कि किसानों के सब्र की परीक्षा का मैदान नजर आ रही थीं।
सड़क ही बिस्तर, ट्रैक्टर ही घर किसानों का वनवास
सैलो पटोरी केंद्र के बाहर का नजारा रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां व्यवस्था के नाम पर सिर्फ अव्यवस्था का साम्राज्य है। कतार के अंतिम छोर पर मिले नीतीश ने बताया कि वो पिछले एक घंटे से खड़े हैं, लेकिन केन्द्र अभी 6 किलोमीटर दूर है। उन्हें पता है कि उनका नंबर शुक्रवार की शाम तक आएगा। यानी अगले तीन दिन और रात उन्हें इसी ट्रैक्टर-ट्राली पर बिताने होंगे। खाने-पीने से लेकर सोने तक, सब कुछ इसी लोहे की ट्राली के साये में होगा।
किसान राजू बर्मन की आंखों में थकान और गुस्सा साफ दिखता है। वह पिछले तीन दिनों से भूखे-प्यासे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर ट्रैक्टर छोड़कर खाना खाने घर गए, तो नंबर कट जाएगा। मजबूरी में नहाना, खाना और सोना इसी धूल भरी सड़क पर करना पड़ रहा है।
24 घंटे में सिर्फ 10 कदम रेंगती हुई खरीदी व्यवस्था
केंद्र के अंदर जाने के लिए 4 किलोमीटर का एक चक्र बनाया गया है, लेकिन काम की गति इतनी धीमी है कि युवा किसान गजराज सिंह के मुताबिक, आधे घंटे में ट्रैक्टर मुश्किल से 10 कदम आगे बढ़ पाता है। वर्तमान में लगभग एक हजार ट्रैक्टर-ट्रालियां लाइन में लगी हैं। भीषण गर्मी में किसानों के पास पीने का पानी तक नहीं है। प्रशासन के पानी के टैंकरों के दावे हवा-हवाई हैं, क्योंकि अव्यवस्थित कतारों के कारण टैंकर अंतिम छोर तक पहुँच ही नहीं पा रहे।
स्लॉट बुकिंग का मायाजाल किसानों के साथ तकनीकी धोखा
इस बार किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी है स्लॉट बुकिंग की तारीखों में अचानक बदलाव। किसान बलराम लोधी भावुक होकर बताते हैं कि उनके स्लॉट की अंतिम तिथि 9 मई थी, लेकिन रातों-रात इसे बदलकर 6 मई कर दिया गया। अब वे 300 ट्रैक्टरों के पीछे हैं। जब तक नंबर आएगा, तब तक उनकी तारीख निकल चुकी होगी। तारीखों के इस खेल से परेशान होकर जगत जैसे कई किसान अब अपना अनाज किसी दूसरे के नाम पर बेचने या वापस घर ले जाने को मजबूर हैं। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता है जो किसानों को बिचौलियों के जाल में धकेल रही है।
भ्रष्टाचार और सुरक्षा का अभाव रक्षक ही बने भक्षक
जहाँ एक तरफ किसान गर्मी और भूख से लड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। किसान बृजेश कुमार लोधी ने सीधा आरोप लगाया कि सैलो कंपनी के गार्ड पैसे लेकर बिचौलियों के ट्रैक्टरों को बीच से ही अंदर करवा रहे हैं। उन्होंने आहत होकर यहाँ तक कह दिया कि किसानों के साथ ऐसा व्यवहार करने वाली सरकार को सत्ता में रहने का हक नहीं है।
किसान राममिलन और किशन लाल ने बताया कि यहाँ न तो पुलिस है और न ही कंपनी के सुरक्षाकर्मी। अनाज चोरी होने का डर बना रहता है और आगे निकलने की होड़ में किसानों के बीच हर 2-3 घंटे में हिंसक विवाद हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों की बढ़ती चिंता और जाम का झाम
खरीदी केंद्र की इस भीड़ ने स्थानीय निवासियों का जीना भी मुहाल कर दिया है।
रवि राज और सलमान बाबू स्थानीय निवासी ने बताया कि हर 2-3 घंटे में सड़क जाम हो रही है। बाहरी लोगों के भारी जमावड़े से स्थानीय स्तर पर असुरक्षा का माहौल है और किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है।
क्षमता से अधिक भार और सर्वर का दोष
सैलो पटोरी के ब्रांच मैनेजर पुष्पेंद्र पटेल से इन अव्यवस्थाओं पर कहना है , की
बहोरीबंद के 22 खरीदी केंद्रों को इसी एक केंद्र में मर्ज कर दिया गया है, जिससे दबाव बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि प्रतिदिन 350 ट्रालियां खाली की जा रही हैं और 15-16 हजार क्विंटल का स्टोरेज हो रहा है। सर्वर डाउन होने और शनिवार-रविवार को भी खरीदी चालू करने के निर्णय के कारण स्लॉट की तारीखों में बदलाव हुआ है। गार्डों द्वारा पैसे लेने की बात पर उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई की जाएगी।
गेहूँ खरीदी में अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने खरीदी केंद्र के बाहर सड़क किनारे लगी किसानों के ट्रैक्टरों की लंबी कतार का एक वीडियो एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा कि 43 डिग्री की भीषण गर्मी में किसान भाई अपनी गेहूँ की फसल लेकर सड़क किनारे खड़े रहने पर मजबूर हैं, क्योंकि मोहन सरकार के पास गेहूँ खरीदने की न तो सही नीति है और न ही सही नीयत।
उन्होंने आगे कहा कि हर खरीदी केंद्र पर व्याप्त गड़बड़ियाँ, तौल काँटों की कमी और अव्यवस्था के कारण आज पूरे प्रदेश का किसान ‘खून के आँसू’ रो रहा है। किसानों के साथ हो रहे इसी अन्याय के विरोध में कल पूरे मध्य प्रदेश के किसान और कांग्रेस पार्टी मुंबई-आगरा राजमार्ग पर चक्का जाम’ करेंगे और कुंभकर्णी नींद में सो रही सरकार को जगाएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी एक वीडियो साझा करते हुए लिखा— क्या मेहनत करना अपराध हो गया है मध्य प्रदेश के किसान का बस यही तो कसूर है कि उसने अपनी मेहनत से गेहूँ की बंपर पैदावार की।
उन्होंने कहा कि अन्नदाता को उनकी मेहनत का सही मूल्य देने के बजाय चिलचिलाती धूप में घंटों फसल बेचने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। यदि गेहूँ की खरीदी मार्च के मध्य से शुरू कर दी गई होती, तो किसान समय रहते अपनी फसल बेच चुका होता और उसे गर्मी व लू के थपेड़े नहीं खाने पड़ते। उन्होंने जोर दिया कि किसानों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरने को तैयार है। इस पूरे मामले पर एसडीएम बहोरीबंद राकेश कुमार चौरसिया का कहना है कि सर्वर में तकनीकी खराबी (अप-डाउन) होने की वजह से किसान अचानक बड़ी संख्या में केंद्रों पर पहुँच रहे हैं। प्रशासन निरंतर निगरानी बनाए हुए है ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। हालाँकि, एक ही स्थान पर 22 केंद्र क्यों स्थापित किए गए, इस सवाल पर उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कटनी के सैलो पटोरी केंद्र की यह तस्वीर मध्य प्रदेश की कृषि व्यवस्था के स्याह पक्ष को उजागर करती है। 22 केंद्रों को एक जगह समेट देना प्रशासनिक अदूरदर्शिता का प्रमाण है। जब तक किसान की फसल का एक-एक दाना सम्मान के साथ नहीं खरीदा जाता, तब तक विकास के तमाम दावे बेमानी हैं। आज कटनी का किसान सड़क पर सोया है, और जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सर्वर डाउन होने का बहाना बना रहे है।
✍️*पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट*







