डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
आरटीई के प्रावधानों पर उठे सवाल, पढ़ाई के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी अकेले उठा रहे बोझ; ग्रामीणों ने की अतिरिक्त शिक्षक की मांग
शहपुरा (डिंडौरी)। जिले के शहपुरा विकासखंड अंतर्गत शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला धिरवन कला से शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर करने वाली एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां 156 विद्यार्थियों की पढ़ाई का जिम्मा मात्र एक शासकीय शिक्षक के कंधों पर है। यह स्थिति शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 की उस मूल भावना पर सवाल खड़े करती है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रावधान है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में पदस्थ एकमात्र शिक्षक को विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूल का संपूर्ण प्रशासनिक कार्य, अभिलेखों का संधारण, शासन की विभिन्न योजनाओं से जुड़े दायित्व और अन्य कार्यालयीन जिम्मेदारियां भी अकेले निभानी पड़ रही हैं। ऐसे में न तो सभी कक्षाओं की नियमित एवं प्रभावी पढ़ाई संभव हो पा रही है और न ही विद्यालय का संचालन अपेक्षित स्तर पर हो पा रहा है।
शिक्षक पर बढ़ते कार्यभार का सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। एक ही समय में कई कक्षाओं का संचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना किसी भी शिक्षक के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे हालात में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना मुश्किल होता जा रहा है।
इस मामले को लेकर पालक संघ अध्यक्ष राम सिंह उइके सहित स्थानीय ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से विद्यालय में तत्काल अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य को होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन धिरवन कला विद्यालय की स्थिति यह दर्शाती है कि योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच अब भी बड़ा अंतर बना हुआ है। उन्होंने मांग की है कि बच्चों के हित को प्राथमिकता देते हुए विद्यालय में शीघ्र अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की जाए, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके।







