उमरिया। कभी उमरिया के पुराने पड़ाव की गलियों और स्थानीय रामलीला के मंच से अभिनय की ककहरा सीखने वाले रंगकर्मी पंकज दुबे ने विश्व सिनेमा के सबसे बड़े मंच पर अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है। जाने-माने निर्देशक नीरज घायवान की बहुचर्चित फिल्म ‘होमबाउंड’ 98वें अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनी है। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई फिल्म में पंकज दुबे ने मुख्य अभिनेता ईशान खट्टर (शोएब) के पिता ‘हसन अली’ का सशक्त किरदार निभाकर शहडोल संभाग सहित पूरे मध्य प्रदेश का मान बढ़ाया है।
रामलीला के मंच से एनएसडी तक का तपस्वी सफर
पंकज दुबे का यह मुकाम रातों-रात नहीं, बल्कि दशकों की अनथक साधना का परिणाम है।
शुरुआती नींव: उमरिया की रामलीला से अभिनय का पहला पाठ पढ़ा और कॉलेज के दिनों में ‘संदेश नाट्य मंच’ रंगमंडल की नींव रखकर स्थानीय नाट्य परंपरा को नया जीवन दिया।
रंगमंच की संपूर्ण विधाएं: उन्होंने केवल अभिनय तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि निर्देशन, संगीत, रूप-सज्जा और परिधान डिजाइनिंग की बारीकियों को भी साधा।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD): अपनी कला को तराशने के लिए वे देश के शीर्ष संस्थान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली पहुंचे। विधिवत प्रशिक्षण के बाद उन्होंने एनएसडी की प्रतिष्ठित रेपर्टरी कंपनी के साथ पेशेवर अभिनेता के तौर पर काम किया।
मायानगरी में पहचान और ‘होमबाउंड‘ की उड़ान
मुंबई के कड़े संघर्ष के बीच पंकज दुबे ने ‘हल्ला बोल’, ‘चिंटू जी’ और ‘ब्लैक वारंट’ जैसी फिल्मों व चर्चित वेब प्रोजेक्ट्स में अपनी अदाकारी की छाप छोड़ी।
‘होमबाउंड’ सामाजिक विषमताओं, प्रवासी जीवन की जद्दोजहद और आत्मसम्मान के लिए संघर्षरत दो दोस्तों की संवेदनशील दास्तान है। इस फिल्म का कान फिल्म फेस्टिवल 2025 में भव्य प्रीमियर हुआ, जहां इसे वैश्विक सराहना मिली। अब ऑस्कर की दौड़ में शामिल होने के बाद फिल्म में पंकज दुबे की सशक्त भूमिका की चर्चा चारों ओर है।
“यह केवल पड़ाव है, मंजिल अभी बाकी है“
ईशान खट्टर, जाह्नवी कपूर और विशाल जेठवा जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म में पंकज दुबे का काम यह साबित करता है कि माटी से जुड़ा सच्चा कलाकार सीमाओं का मोहताज नहीं होता। उमरिया का यह गौरवशाली सफर यह पैगाम देता है कि निष्ठा और लगन हो, तो छोटे शहरों की गलियों से भी विश्व सिनेमा के सर्वोच्च फलक तक का रास्ता तय किया जा सकता है।
अजय पाल
