ईंट भट्ठे की मजदूरी से खाकी तक: तुषार गाँव के देवा डहरिया ने पेश की मिसाल
सक्ति। कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो किस्मत की लकीरों को भी बदला जा सकता है। सक्ति जिले के जैजैपुर ब्लॉक के एक छोटे से गाँव ‘तुषार’ के रहने वाले देवा डहरिया ने इस बात को सच कर दिखाया है। कभी पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों पर मजदूरी करने वाले देवा आज छत्तीसगढ़ पुलिस में आरक्षक (Constable) के पद पर चयनित हो चुके हैं।
कक्षा 5वीं के बाद छूट गई थी पढ़ाई
देवा के पिता, गोवर्धन डहरिया और उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। हालात इतने खराब थे कि देवा को कक्षा 5वीं के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा। बचपन खेल-कूद और किताबों के बजाय ईंटों की ढलाई और कड़ी धूप में मजदूरी करते हुए बीतने लगा। देवा बताते हैं, “8 साल तक मैं पढ़ाई से पूरी तरह दूर रहा। ईंट भट्ठे पर काम करके बस गुजारा भर हो पाता था, न समाज में इज्जत थी और न ही भविष्य का कोई ठिकाना।”
कोरोना काल बना ‘टर्निंग पॉइंट’
साल 2020 में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से सहमी हुई थी, तब देवा के जीवन में उम्मीद की एक किरण जागी। उनके मित्र रोशन खुटे ने उन्हें ‘छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल’ के बारे में बताया। 8 साल के अंतराल के बाद देवा ने फिर से हाथ में किताब थामी और 10वीं की परीक्षा पास की।
हालाँकि, राह आसान नहीं थी। गाँव के कुछ लोगों ने तंज भी कसे कि “तुमसे नहीं हो पाएगा, समय बर्बाद कर रहे हो”, लेकिन देवा ने नकारात्मकता को खुद पर हावी नहीं होने दिया।
संघर्ष से सफलता का सफर: हंसल एकेडमी का साथ
2023 में देवा ने जैजैपुर स्थित हंसल एकेडमी और लाइब्रेरी में अपनी तैयारी शुरू की। 8 साल की पढ़ाई छूटने के कारण गणित और रीजनिंग उनके लिए पहाड़ जैसे कठिन थे।
”शुरुआत में मुझे कुछ समझ नहीं आता था, खासकर गणित। लेकिन दिलीप देवांगन सर और सुरेश साहू सर के मार्गदर्शन में जब मैंने बिना फॉर्मूले के ‘कॉन्सेप्ट’ समझना शुरू किया, तो पढ़ाई आसान लगने लगी।” — देवा डहरिया
असफलताएं बनीं कामयाबी की सीढ़ी
वर्दी पहनने का सपना देवा की आंखों में बस चुका था। इस दौरान वे आर्मी, SSC GD और नगर सैनिक जैसी परीक्षाओं में असफल भी हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 3 साल की निरंतर ‘तपस्या’ का फल उन्हें साल 2026 में मिला, जब उनका चयन रायपुर जिले में पुलिस आरक्षक के पद पर हुआ।
माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू
रिजल्ट आने के बाद जब देवा ने यह खबर अपने माता-पिता को सुनाई, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जो हाथ कभी ईंटें थापते थे, अब वे हाथ कानून की रक्षा करेंगे और सलाम ठोकेंगे। देवा की यह सफलता आज क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
पुलिसवाला न्यूज़ की पूरी टीम की तरफ से देवा को हार्दिक शुभकामनाएं।
रिपोर्ट : मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ,पुलिसवाला न्यूज़
