डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
12.40 लाख की लागत से बनना है पीएम जनमन का नवीन भवन; मौके पर कुछ गड्ढे, रेत-गिट्टी का दावा—ग्रामीणों ने बिल, भुगतान और सामग्री के भौतिक सत्यापन की उठाई मांग
डिंडौरी। जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सिधौली के बैगन टोला में पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत नवीन आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्य शुरुआत में ही सवालों के घेरे में आ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 12 लाख 40 हजार रुपए की लागत से बनने वाले भवन का निर्माण अभी धरातल पर ठीक से शुरू भी नहीं हुआ, लेकिन सामग्री खरीदी के नाम पर 2 लाख 99 हजार 700 रुपए का भुगतान किया जा चुका है। मौके की स्थिति और कथित भुगतान के आंकड़ों में अंतर बताते हुए ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच और सामग्री का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।

ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण स्थल पर फिलहाल भवन का कोई स्पष्ट स्वरूप नजर नहीं आ रहा है। मौके पर कुछ गड्ढे दिखाई दे रहे हैं और सामग्री के रूप में रेत-गिट्टी रखे होने की बात कही जा रही है। वहीं ग्रामीणों का दावा है कि बिलों में लाखों रुपए की निर्माण सामग्री की खरीदी दर्शाई गई है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि जब निर्माण शुरुआती अवस्था में है तो करीब तीन लाख रुपए की सामग्री कहां है और इतनी राशि का भुगतान किस आधार पर किया गया?
भुगतान हुआ तो सामग्री कहां?
मामले में सबसे अहम सवाल मौके पर उपलब्ध सामग्री और भुगतान को लेकर खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि 2 लाख 99 हजार 700 रुपए की निर्माण सामग्री वास्तव में खरीदी गई है तो उसका भंडारण कहां किया गया है और वह निर्माण स्थल पर क्यों दिखाई नहीं दे रही? ग्रामीणों ने खरीदी के बिल, भुगतान वाउचर, सामग्री की मात्रा और स्टॉक का मौके पर उपलब्ध सामग्री से मिलान कराने की मांग की है।
सरपंच पति के कथित हस्तक्षेप पर भी सवाल
आंगनवाड़ी भवन के साथ ग्राम पंचायत के अन्य शासकीय निर्माण कार्यों में सरपंच पति के कथित हस्तक्षेप को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पंचायत के निर्माण कार्यों से जुड़े निर्णयों और गतिविधियों में सरपंच पति की सक्रिय भूमिका रहती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के मिलान की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से निर्माण स्थल का निरीक्षण कर स्वीकृत राशि, तकनीकी प्राक्कलन, सामग्री खरीदी के बिल, भुगतान वाउचर और निर्माण की वास्तविक प्रगति का मिलान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भुगतान किस एजेंसी अथवा विक्रेता को, किस सामग्री के लिए और किस आधार पर किया गया।

अब सवाल प्रशासन और जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने है कि भवन निर्माण की शुरुआती स्थिति में ही करीब तीन लाख रुपए का भुगतान किस आधार पर हुआ? खरीदी गई बताई जा रही सामग्री आखिर कहां है? ग्रामीणों की मांग है कि निष्पक्ष जांच कर स्थिति सार्वजनिक की जाए और यदि भुगतान अथवा खरीदी प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।







