डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
*अल्पवर्षा और सूखे से बचाव हेतु कृषि विभाग की वैज्ञानिक सलाह*
जल संरक्षण, सूखा सहनशील फसलों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील
डिंडोरी। एल-नीनो प्रभाव और मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए अल्पवर्षा एवं सूखे की संभावित परिस्थितियों से निपटने हेतु वैज्ञानिक सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों से वर्षा जल संरक्षण, उपलब्ध जल संसाधनों के समुचित उपयोग तथा मौसम आधारित कृषि पद्धतियां अपनाने का आग्रह किया है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खेतों में वर्षा जल संचयन, बोरवेल रिचार्ज, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देना वर्तमान परिस्थितियों में अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही जीरो टिलेज एवं फसल अवशेष प्रबंधन अपनाकर मिट्टी में नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है। किसानों को पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही बुवाई करने तथा कम अवधि में तैयार होने वाली एवं सूखा सहनशील फसल किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों ने खेतों में नमी संरक्षण के लिए ब्रॉडबेड एवं फरो, रिज एवं फरो पद्धति, कंटूर नालियां, स्ट्रिप इंटरक्रॉपिंग और कम्पार्टमेंटल बंडिंग जैसी तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया है। साथ ही खेत तालाबों में संग्रहित जल का आवश्यकता अनुसार उपयोग करने तथा मानसून में देरी की स्थिति को देखते हुए धान की पौध पहले से तैयार रखने की सलाह भी दी गई है।
कृषि विभाग ने किसानों को एकल फसल के बजाय अंतरवर्तीय खेती (इंटरक्रॉपिंग) अपनाने की सलाह दी है। इसके अंतर्गत ज्वार के साथ अरहर, बाजरा के साथ अरहर, अरहर के साथ मूंगफली तथा अरहर के साथ सूरजमुखी जैसी फसल प्रणालियां अपनाकर उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकता है।
विभाग ने बताया कि यदि बुवाई के बाद 15 से 20 दिनों तक वर्षा नहीं होती और अंकुरण प्रभावित होता है, तो किसान निंदाई-गुड़ाई, गैप फिलिंग एवं आवश्यकता अनुसार पुनर्बुवाई करें। वहीं मध्यावधि सूखे की स्थिति में पौधों की संख्या का नियमन, पर्णीय पोषण, खरपतवार नियंत्रण, सतही मल्चिंग तथा उपलब्ध संसाधनों से जीवन रक्षक सिंचाई फसलों को बचाने में सहायक सिद्ध होगी।
कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे मौसम आधारित वैज्ञानिक सलाह का पालन करें तथा अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारियों एवं कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें, ताकि संभावित सूखे की स्थिति में फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।







