शिकायतों का अंबार, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा! आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी के पीछे क्या है वजह ?
बहोरीबंद। तहसील क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का मामला लगातार गंभीर होता नजर आ रहा है। सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायतों के बीच अब कस्टोडियन एवं चारागाह भूमि भी अतिक्रमण की जद में होने के आरोप सामने आ रहे हैं। जिन जमीनों का उपयोग सार्वजनिक हित और पशुओं के चरने के लिए होना चाहिए, उन पर कथित रूप से कब्जे की स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच रही हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों को जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण की जानकारी नहीं है, या फिर शिकायतों को महज कागजी औपचारिकता मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जा रहा है?
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं ?
स्थानीय स्तर पर अतिक्रमण को लेकर शिकायतें किए जाने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। आखिर सीमांकन, जांच और अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है, वे अपनी जिम्मेदारी कब निभाएंगे? क्या प्रशासन किसी बड़े विवाद या अप्रिय स्थिति का इंतजार कर रहा है?
✍️ चारागाह भूमि पर कब्जा, पशुओं के लिए कहां बचेगी जगह ?
चारागाह भूमि का उद्देश्य गांव के पशुओं को चरने के लिए सार्वजनिक जगह उपलब्ध कराना है। यदि ऐसी भूमि पर अतिक्रमण होता है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण व्यवस्था और पशुपालकों पर पड़ता है। वहीं कस्टोडियन भूमि पर कथित कब्जे का मामला भी जांच का विषय है। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा आखिर किसकी जिम्मेदारी है
✍️ प्रशासन की जवाबदेही तय होना जरूरी
अब जरूरत केवल शिकायतों पर संज्ञान लेने की नहीं बल्कि संबंधित भूमि का निष्पक्ष सीमांकन राजस्व अभिलेखों की जांच और अतिक्रमण की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए की शिकायतें मिलने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई , और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके लिए जवाबदेह कौन ?
सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है किसी व्यक्ति विशेष की निजी जागीर नहीं। ऐसे में प्रशासन को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। सवाल अब भी वही है – *क्या सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगी या शिकायतों का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा और सरकारी जमीनों पर कब्जे के आरोप बढ़ते रहेंगे*?
✍️ पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से संभाग ब्यूरो पारस गुप्ता की रिपोर्ट







