आमदी (द) पंचायत में ₹7.26 लाख के खर्च पर सवाल, तीन महीने बाद भी धारा 40 की कार्रवाई का इंतजार!
मुरमीकरण से सोलर स्ट्रीट लाइट तक अनियमितताओं पर आपत्तियां, सरपंच बोले—काम कराया है, सचिव ने कहा—बिना प्रस्ताव राशि आहरित
गरियाबंद। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का हिसाब आखिर कौन देगा? जब लाखों रुपये के व्यय पर सवाल उठें, जांच में आपत्तियां दर्ज हों और कार्रवाई की प्रक्रिया महीनों तक लंबित रहे, तो जवाबदेही पर सवाल उठना लाजिमी है। गरियाबंद जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत आमदी (द) में 7 लाख 26 हजार रुपये से अधिक के कथित अनियमित व्यय का मामला इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पंचायत के जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।
जिला पंचायत गरियाबंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जून 2026 में जारी कारण बताओ नोटिस में विभिन्न मदों के खर्च पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। संबंधित सरपंच आत्माराम को तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय में जवाब नहीं देने अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। बावजूद इसके, मामले में धारा 40 के तहत कार्रवाई का इंतजार बना हुआ है।
₹7.26 लाख के खर्च पर सवाल, जिम्मेदारी की गेंद एक-दूसरे के पाले में!
जांच में मुरमीकरण कार्य के लिए ₹1.20 लाख की राशि पर आपत्ति दर्ज की गई। बताया गया कि भौतिक निरीक्षण के दौरान स्थल पर कार्य नहीं मिला तथा आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति और पंचायत अनुमोदन से संबंधित कमियां सामने आईं।
वहीं, सोलर स्ट्रीट लाइट मद में ₹2,63,175 की राशि पर सवाल उठे। छह सोलर स्ट्रीट लाइट की स्वीकृति के बावजूद मौके पर पांच पोल पाए जाने तथा एक पोल सहित छह सोलर पावर जनरेटिंग डिवाइस नहीं लगाए जाने की जानकारी सामने आई।
इसके अलावा ₹2 लाख के व्यय को लेकर कार्य विवरण, कैशबुक, बिल-वाउचर और पंचायत अनुमोदन संबंधी कमियां दर्ज की गईं। सुशासन तिहार शिविर, सरपंच-पंचों के मानदेय, मरम्मत और अन्य खर्चों को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं। इन सभी मदों को मिलाकर कुल ₹7.26 लाख से अधिक के व्यय पर सवाल उठे हैं।
अब सवाल यह है कि यदि कार्य हुए हैं, तो उनके दस्तावेज और भौतिक सत्यापन क्या कहते हैं? और यदि पंचायत प्रस्ताव व पंचों की सहमति के बिना राशि निकाली गई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
सचिव का आरोप—बिना प्रस्ताव राशि निकाली, सरपंच का दावा—काम कराया है!
इस मामले में पंचायत के सचिव ने बताया कि उन्हें मुरमीकरण कार्य की जानकारी है, जबकि अन्य मदों में सरपंच आत्माराम द्वारा बिना प्रस्ताव और पंचों की राय के राशि आहरित किए जाने की बात कही गई है।
दूसरी ओर, सरपंच आत्माराम ध्रुव का कहना है कि उन्होंने पंचायत क्षेत्र में संबंधित राशि के अनुरूप कार्य कराए हैं और जिला पंचायत गरियाबंद को स्पष्टीकरण भी दे दिया है। उनका कहना है कि प्रशासन चाहे तो दोबारा जांच करा सकता है।
एक तरफ सचिव की ओर से बिना प्रस्ताव राशि आहरण का आरोप, तो दूसरी तरफ सरपंच की ओर से काम कराने और स्पष्टीकरण देने का दावा—ऐसे में सच्चाई का फैसला आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि दस्तावेजों, स्थल निरीक्षण और निष्पक्ष जांच से ही संभव है।
सीईओ बोले—जवाब नहीं मिला, धारा 40 की कार्रवाई के लिए लिखेंगे
जिला पंचायत गरियाबंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के अनुसार, सरपंच की ओर से अब तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि धारा 40 के अंतर्गत कार्रवाई के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, गरियाबंद को अतिशीघ्र पत्र लिखा जाएगा।
सीईओ के इस बयान के बाद सरपंच के स्पष्टीकरण देने के दावे और प्रशासन के रिकॉर्ड में जवाब प्राप्त नहीं होने की बात के बीच स्थिति स्पष्ट करना भी जरूरी हो गया है। आखिर स्पष्टीकरण कब और किस माध्यम से दिया गया? यदि जवाब प्रस्तुत किया गया है, तो उसकी प्राप्ति और परीक्षण की स्थिति क्या है?
तीन महीने बाद भी कार्रवाई का इंतजार, जवाबदेही किसकी?
सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठना जितना गंभीर है, उतना ही महत्वपूर्ण है समय पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना। यदि अनियमितता हुई है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए; और यदि आरोप तथ्यों से परे हैं, तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
जनता के पैसे का हिसाब केवल कागजों में नहीं, धरातल पर भी दिखना चाहिए। आमदी (द) पंचायत के इस मामले में अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या धारा 40 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ेगी, क्या कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होगी और क्या सरकारी राशि के खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक होगा? इन सवालों के जवाब का इंतजार ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों को है।
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद







