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Home - क्षेत्रीय खबर - IPS अंकिता शर्मा के समर्थन में उठीं आवाजें, ‘लेडी सिंघम’ को एक वायरल वीडियो से आंकना कितना उचित?
क्षेत्रीय खबर

IPS अंकिता शर्मा के समर्थन में उठीं आवाजें, ‘लेडी सिंघम’ को एक वायरल वीडियो से आंकना कितना उचित?

PolicewalaBy PolicewalaOctober 23, 2026No Comments7 Views
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IPS अंकिता शर्मा के समर्थन में उठीं आवाजें, ‘लेडी सिंघम’ को एक वायरल वीडियो से आंकना कितना उचित?

: रिकेश सेन ने किया समर्थन, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने उठाए सुरक्षा संबंधी सवाल; PHQ के स्पष्टीकरण के बीच अंकिता शर्मा के पूरे कार्यकाल के मूल्यांकन की चर्चा।

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की पुलिस अधीक्षक आईपीएस अंकिता शर्मा इन दिनों दशहरे पर शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से फायरिंग के वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थन और आलोचना, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ लोगों ने हथियार संचालन और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं कई लोगों ने अंकिता शर्मा के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा है कि किसी अधिकारी के पूरे कार्यकाल का मूल्यांकन केवल एक वायरल वीडियो के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।

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रिकेश सेन ने किया अंकिता शर्मा का समर्थन।

सोशल मीडिया पर रिकेश सेन ने आईपीएस अंकिता शर्मा के समर्थन में पोस्ट साझा की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारत की महिलाएं कमजोर नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने दशहरे के अवसर पर सामने आए वीडियो को महिला सशक्तीकरण के संदेश से जोड़ते हुए अंकिता शर्मा के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

रिकेश सेन की पोस्ट में अंकिता शर्मा के प्रति गर्व और समर्थन का भाव दिखाई देता है। इस प्रतिक्रिया के माध्यम से उन्होंने महिला अधिकारियों की क्षमता और आत्मविश्वास को लेकर अपना पक्ष रखा।
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‘लेडी सिंघम’ की छवि और पूरे कार्यकाल का  सवाल।

आईपीएस अंकिता शर्मा को सोशल मीडिया पर कई लोग ‘लेडी सिंघम’ के नाम से भी संबोधित करते हैं। यह उपनाम उनकी सख्त पुलिस अधिकारी वाली छवि के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है। उनके समर्थन में उठ रही आवाजों का कहना है कि किसी अधिकारी की पहचान केवल एक घटना या वायरल वीडियो तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों की रोकथाम, गंभीर मामलों की निगरानी और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़ी होती है। इसलिए किसी अधिकारी के कामकाज का मूल्यांकन करते समय उसके पूरे कार्यकाल, आधिकारिक रिकॉर्ड और सत्यापित उपलब्धियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

हालांकि, अंकिता शर्मा के कार्यकाल की विशिष्ट उपलब्धियों का आकलन संबंधित मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि उनके काम का सही और तथ्यात्मक चित्र सामने आ सके।

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने उठाए सवाल।

दूसरी ओर, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की आलोचना करते हुए हथियार संचालन और सुरक्षा संबंधी कई आपत्तियां उठाईं। उनके पोस्ट के अनुसार, लोडेड हथियार को संभालने के तरीके, सुरक्षा नियमों के पालन, हथियार को अलग-अलग दिशाओं में तानने और प्रशिक्षण के दौरान सिखाए जाने वाले बुनियादी नियमों को लेकर सवाल हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई से स्वयं या आसपास मौजूद लोगों को चोट पहुंचने का खतरा हो सकता है। उन्होंने मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जरूरत भी बताई।

ढिल्लों की ये टिप्पणियां उनकी ओर से उठाई गई आपत्तियां हैं। वीडियो और संबंधित परिस्थितियों की आधिकारिक समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के संबंध में क्या निष्कर्ष निकलता है।

शस्त्र पूजा की परंपरा के साथ सुरक्षा नियम भी महत्वपूर्ण

विजयादशमी पर शस्त्र पूजा भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस बल में भी इस अवसर पर शस्त्र पूजा की जाती है। राजनांदगांव पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम के बाद वायरल हुए वीडियो ने इसी परंपरा और हथियार संचालन के निर्धारित नियमों को लेकर बहस छेड़ दी है।

एक पक्ष इस घटनाक्रम को शस्त्र पूजा और महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष हथियारों के सुरक्षित संचालन और पुलिस अनुशासन पर जोर दे रहा है। दोनों पहलुओं पर चर्चा के बीच यह जरूरी है कि किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले पूरे घटनाक्रम और संबंधित नियमों को ध्यान में रखा जाए।

पुलिस मुख्यालय ने मांगा स्पष्टीकरण।

वायरल वीडियो के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा एसपी अंकिता शर्मा से स्पष्टीकरण मांगे जाने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम में अब उनके जवाब और विभागीय प्रक्रिया पर नजर है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद मामले में आगे क्या कदम उठाया जाएगा, यह संबंधित अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगा।

स्पष्टीकरण मांगा जाना अपने आप में अंतिम दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। इसलिए विभागीय प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने से पहले किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

आलोचना अपनी जगह, निष्पक्ष मूल्यांकन भी जरूरी।

सोशल मीडिया पर किसी घटना को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। सार्वजनिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा होनी चाहिए और सुरक्षा नियमों के पालन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि किसी अधिकारी के पूरे पेशेवर जीवन का आकलन केवल एक वीडियो के आधार पर न किया जाए।

अंकिता शर्मा के समर्थन में उठ रही आवाजों का मुख्य तर्क यही है कि घटना की निष्पक्ष समीक्षा हो, लेकिन उनके पूरे कार्यकाल और पुलिस सेवा में किए गए कामों को भी समान महत्व मिले। वहीं, आलोचना करने वालों की ओर से उठाए गए सुरक्षा संबंधी सवालों का उत्तर तथ्यों और आधिकारिक स्पष्टीकरण के आधार पर सामने आना चाहिए।

निष्कर्ष।

राजनांदगांव एसपी आईपीएस अंकिता शर्मा से जुड़ा यह मामला शस्त्र पूजा की परंपरा, हथियारों के सुरक्षित संचालन, पुलिस अनुशासन और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक अधिकारियों के मूल्यांकन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। रिकेश सेन ने उनके समर्थन में अपनी बात रखी है, जबकि पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने सुरक्षा संबंधी आपत्तियां उठाई हैं।

ऐसे में उचित होगा कि मामले की समीक्षा निष्पक्षता से हो और अंकिता शर्मा के पूरे कार्यकाल का मूल्यांकन उनके आधिकारिक रिकॉर्ड तथा सत्यापित कार्यों के आधार पर किया जाए। किसी एक वायरल वीडियो को उनकी संपूर्ण पहचान बना देना उचित नहीं होगा। साथ ही, सुरक्षा नियमों से जुड़े सवालों का जवाब भी तथ्यों और विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से सामने आना चाहिए।
WhatsApp Image 2026 10 23 at 09.17.36 4रिपोर्टर: मयंक श्रीवास्तवब्यूरो चीफ, पुलिसवाला न्यूज़

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