चिरमिरी – एमसीबी – जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के जिला चिकित्सालय चिरमिरी में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक भव्य जागरूकता रैली एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष यह आयोजन वैश्विक थीम “Lived Experiences Heard: Real Voices, Real Change” (अनुभवों को सुनें, वास्तविक आवाज़ें–वास्तविक बदलाव) के अंतर्गत संपन्न हुआ। रैली का मुख्य उद्देश्य समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक रोगों से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों व अंधविश्वास को दूर करना और जरूरतमंदों को समय पर सही चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है।
इस गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन, सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रताप सिंह तोमर के नेतृत्व तथा जिला नोडल अधिकारी (NMHP) डॉ. नम्रता चक्रवर्ती के सफल समन्वय में किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) शिशिर जायसवाल एवं प्रभारी हॉस्पिटल मैनेजर वीरेन्द्र साव का विशेष सहयोग रहा। रैली में के.बी. पटेल नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं, जिला चिकित्सालय के नर्सिंग स्टाफ एवं अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक गगनभेदी नारों और तख्तियों के साथ सहभागिता की।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया “मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है, लेकिन सामाजिक झिझक के कारण लोग इस पर खुलकर बात नहीं करते। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग एमसीबी (MCB) का यह संकल्प है कि जिले के अंतिम छोर तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए। हमारा उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि एक ऐसा संवेदनशील समाज बनाना है जहाँ अवसाद या तनाव से जूझ रहा व्यक्ति बिना किसी डर या संकोच के अपनी बात रख सके। यदि किसी को भी लगातार उदासी या घबराहट महसूस हो, तो वे हमारे स्वास्थ्य केंद्रों में आएं; इसका इलाज पूरी तरह संभव है।”
जिला नोडल अधिकारी (NMHP) डॉ. नम्रता चक्रवर्ती ने बताया “इस वर्ष की थीम ‘रियल वॉयस, रियल चेंज’ हमें यह सिखाती है कि जो लोग मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों का सामना कर चुके हैं, हमें उनके अनुभवों को सम्मान देना चाहिए। मानसिक रोगियों के प्रति समाज में भेदभाव और उपेक्षा की भावना को समाप्त करना ही हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है। समाज में संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करके ही हम वास्तविक बदलाव ला सकते हैं। शुरुआती लक्षणों की पहचान और सही समय पर डॉक्टर की सलाह मरीज को एक सामान्य और बेहतर जीवन दे सकती है।”
मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाएं
गोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने आम जनमानस को मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ बेहद उपयोगी और व्यावहारिक टिप्स साझा किए:
* नियमित दिनचर्या व पर्याप्त नींद: एक निश्चित समय पर सोकर उठना और 7-8 घंटे की गहरी नींद लेना मस्तिष्क को रिचार्ज करता है।
* शारीरिक गतिविधियां: योग, व्यायाम या रोजाना सुबह की सैर तनाव को कम करने वाले हार्मोन्स (एंडोर्फिन) को सक्रिय करती है।
* सकारात्मक संवाद: अकेलेपन से बचें। अपने परिवार, शुभचिंतकों और मित्रों के साथ नियमित रूप से मन की बातें साझा करें।
* लक्षणों को न छुपाएं: यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से अत्यधिक उदासी, बेवजह चिंता, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन या दैनिक कार्यों में रुचि की कमी महसूस कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह किसी मानसिक विकार का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।
घर बैठे सहायता: राष्ट्रीय टेली-मानस हेल्पलाइन का लें सहारा
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) की टीम ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव, अवसाद या परीक्षा/नौकरी की चिंता होने पर सरकार द्वारा जारी निःशुल्क सेवाओं का लाभ उठाएं:
* राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर: टोल-फ्री नंबर 14416 पर 24 घंटे निःशुल्क परामर्श उपलब्ध है।
* डिजिटल सहायता: गूगल प्ले स्टोर से Tele-MANAS मोबाइल ऐप डाउनलोड कर घर बैठे ही अनुभवी मनोवैज्ञानिकों से मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए सहायता मांगना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक जागरूक और स्वस्थ जीवन की दिशा में आपका पहला सकारात्मक कदम है।
रिपोर्ट – योगेन्द्र प्रताप सिंह ब्यूरो चीफ







