डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
अमृत सरोवर, चेकडेम, तालाब और मिनी परकुलेशन टैंक समेत विभिन्न कार्यों में अनियमितता के आरोप, भौतिक सत्यापन और बिल-बाउचर की जांच की मांग
शहपुरा। ग्राम पंचायत गुरैया में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कराए गए विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्राम गुरैया निवासी सम्हर सिंह मसराम ने 06 अक्टूबर दिन मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर डिंडौरी के नाम अनुविभागीय अधिकारी राजस्व शहपुरा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर ग्राम पंचायत क्षेत्र में कराए गए निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
आवेदन में सरपंच, सचिव एवं संबंधित पंचायत कर्मियों पर कथित तौर पर घटिया एवं गुणवत्ताहीन कार्य कराने, फर्जी बिल-बाउचर के माध्यम से शासकीय राशि के दुरुपयोग तथा कुछ कार्यों को धरातल पर अनुपयोगी अथवा निर्धारित मापदंडों के विपरीत कराए जाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अमृत सरोवर से लेकर गेवियान स्ट्रक्चर तक पर सवाल
शिकायतकर्ता ने आवेदन में अमृत सरोवर, गेवियन स्ट्रक्चर, पर्वत पिट, मिनी परकुलेशन टैंक सहित कई कार्यों का उल्लेख किया है। आवेदन के अनुसार अमृत सरोवर पर करीब 42.15 लाख रुपये, गेवियन स्ट्रक्चर पर करीब 4.80 लाख रुपये तथा अतिरिक्त 7.20 लाख रुपये, पर्वत पिट पर करीब 4 लाख रुपये और मिनी परकुलेशन टैंक पर करीब 12.40 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ स्थानों पर पहले से मौजूद संरचनाओं को दूसरे निर्माण कार्य के रूप में दर्शाकर राशि का उपयोग किया गया। वहीं कुछ निर्माण ऐसे स्थानों पर कराए जाने का आरोप है, जिनसे ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
24.91 लाख के तालाब निर्माण पर भी सवाल
आवेदन में गंगा जल संवर्धन योजना के तहत सेमर नाला में करीब 24.91 लाख रुपये की लागत से कराए गए तालाब निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार बांध में निर्धारित तकनीकी प्रावधानों के अनुरूप मिट्टी का उपयोग नहीं किया गया और वर्षा के दौरान पानी रोकने के बजाय वेस्ट वियर के माध्यम से पानी निकाला गया। शिकायत में इस पूरे कार्य की तकनीकी एवं भौतिक जांच कराने की मांग की गई है।
इसके अलावा वर्ष 2016-17 में करीब 14.60 लाख रुपये की लागत से निर्मित तालाब में बांध निर्माण नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
चेकडेम और मिनी परकुलेशन टैंकों की उपयोगिता पर प्रश्न
शिकायत में छौरहा नाला में वर्ष 2022-23 में करीब 22 लाख रुपये की लागत से बनाए गए चेकडेम का भी उल्लेख है। इसमें गेट नहीं लगाए जाने, निर्धारित खुदाई नहीं होने तथा जल संग्रहण नहीं हो पाने का आरोप लगाया गया है।
इसी तरह दौरखा नाला के ऊपर करीब 15 लाख रुपये की लागत से चेकडेम निर्माण, उसके समीप करीब 12 लाख रुपये की एक अन्य संरचना, पीपर टोला में तालाब जीर्णोद्धार, साठिया टोला में चेकडेम एवं नाला विस्तारीकरण, स्वागत गेट निर्माण समेत कई कार्यों को शिकायत में जांच के दायरे में लेने की मांग की गई है।
एक ही क्षेत्र में बार-बार निर्माण का आरोप
आवेदन में वर्ष 2019-20 के मिनी परकुलेशन टैंक, गेवियन स्ट्रक्चर तथा उसके आसपास बनाए गए अन्य मिनी परकुलेशन टैंकों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर एक ही क्षेत्र में एक के नीचे दूसरा निर्माण कर शासकीय राशि का उपयोग किया गया, जिसकी मौके पर जांच किए जाने की जरूरत है।
इसके अलावा डुकरीगांव के रास्ते में समनपुरा क्षेत्र में वर्ष 2024-25 में करीब 12.50 लाख रुपये की लागत से बनाए गए मिनी परकुलेशन टैंक, स्वागत गेट, सीसी निर्माण सहित अन्य कार्यों की भी जांच की मांग की गई है।
स्वागत द्वारा और सडक निर्माण भी जांच के दायरे में
ग्राम पंचायत में सड़क एवं अन्य निर्माण कार्य को लेकर भी शिकायत की गई है इसमें स्वागत द्वार पर करीब 5 लाख सीसी सड़क निर्माण पर करीब 3 लाख रुपए तथा साठीया टोला में सीसी सड़क पर करीब 2 लाख रुपए खर्च होने का उल्लेख किया गया है इन सभी कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
बिल-बाउचर से लेकर आय से अधिक संपत्ति तक जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच ही नहीं, बल्कि संबंधित कार्यों के बिल-बाउचर, मस्टर रोल, तकनीकी स्वीकृति, एस्टीमेट, एमबी (मेजरमेंट बुक), डीपीआर, उपयोगिता प्रमाण पत्र तथा भुगतान संबंधी अभिलेखों की भी जांच कराने की मांग की है।
आवेदन में सप्लायर महिमा ट्रेडर्स से संबंधित बिलों की जांच, पंचायत से जुड़े व्यक्तियों के खातों में शासकीय राशि के कथित लेन-देन की जांच तथा संबंधित जिम्मेदारों की संपत्ति की भी जांच कराने की मांग की गई है।
भौतिक सत्यापन से सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत गुरेया में पिछले और वर्तमान पंचवर्षीय कार्यकाल में कराए गए सभी निर्माण कार्यों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही निर्माण की वास्तविक लागत, उपयोगिता, गुणवत्ता और स्वीकृत डीपीआर के अनुरूप कार्य हुआ या नहीं, इसकी तकनीकी जांच कराई जाए।
आवेदन में कहा गया है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो शिकायतकर्ता न्यायालय की शरण लेने के लिए स्वतंत्र रहेगा। अब देखना होगा कि जनसुनवाई में दिए गए इस आवेदन पर प्रशासन किस स्तर की जांच कराता है और जांच के बाद निर्माण कार्यों को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता सामने आती है।







