बजरंग पावर का पावर राज
पाली थाना में न्याय की फरियाद में धरने पर बैठे आदिवासी
बिरसिंहपुर पाली — उमरिया जिले के पाली विकासखंड में अब संविधान नहीं, बजरंग पावर का फरमान चल रहा है। रायपुर की श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड ने पथौरा पश्चिमी कोल माइन के नाम पर ऐसा आतंक मचा रखा है कि दो गांव घुनघुटी और गिठौरा के आदिवासियों की रातों की नींद उड़ गई है। कंपनी की जेसीबी गांव की जीवनरेखा पर चल रही है, किसानों की 57.57 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर अवैध बाउंड्री ठोकी जा रही है और विरोध करने पर घर में घुसकर मां-बहन की गाली और जातिसूचक अपमान किया जा रहा है। इसी जुल्म के खिलाफ अब पाली थाना में धरने पर आदिवासी बैठ गए हैं और थाने के बाहर हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है। 
कहानी की शुरुआत घुनघुटी से होती है। यहां गांव का एकमात्र सहारा एक शासकीय तालाब है, जिससे पूरे गांव के मवेशी पानी पीते हैं, निस्तार होता है और 50 एकड़ खेतों में नमी बनी रहती है। आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने इस तालाब को ही निगलने का प्लान बना लिया। बिना ग्राम सभा, बिना पंचायत प्रस्ताव और बिना कलेक्टर के आदेश के जेसीबी और हाईवा तालाब की मेड़ पर पहुंच गए और उसे फोड़कर खदान में मिलाने लगे। जेसीबी का पंजा चलते ही पूरे गांव में भूचाल आ गया। सैकड़ों महिला-पुरुष लाठी लेकर दौड़ पड़े और काम रुकवा दिया।
तालाब वाला मामला अभी थमा भी नहीं था कि कंपनी ने गिठौरा में किसानों की छाती पर बाउंड्री खड़ी कर दी। पीड़ित हरेन्द्र सिंह, विजय सिंह, बृजलाल सिंह, नरेन्द्र सिंह, भानन सिंह, नारायण सिंह और अन्य खातेदारों ने 28 सितंबर 2026 को पाली थाने में मोहर लगी शिकायत देकर बताया कि उनकी पा.क्र.नं. 42 रकबा 57.57 एकड़ जमीन का बंटवारा प्रकरण RCSA 32/25 न्यायालय तहसीलदार पाली में विचाराधीन है और न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। आरोप है कि इसी आदेश को पैरों तले रौंदते हुए कंपनी के महाप्रबंधक शशिधर द्विवेदी के इशारे पर बिना नोटिस, बिना मुआवजे के रातों-रात उनकी 50 साल पुरानी काबिज जमीन पर दीवार ठोक दी गई।
जब किसान अपनी जमीन पर पहुंचे तो कंपनी ने तीसरा और सबसे घिनौना हमला बोला। पीड़ित आदिवासी महिलाओं सुनीता, नीलम, पुष्पा खैरवार, राधा लकड़ा, सुमन सिंह ने 3 अक्टूबर 2026 को थाने में दूसरी शिकायत में आरोप लगाया कि कंपनी के गुर्गे शशिधर द्विवेदी, आनंद कुमार द्विवेदी, एस.के. गुप्ता, राजेश साह, सौरभ मिश्रा, विजय यादव, शिवम शर्मा, अशोक प्रताप सिंह उर्फ शक्ति प्रताप सिंह, दीपेन्द्र यादव, कमलेश कुमार रैदास उनके घरों में घुस आए और जातिसूचक गालियां देकर 10 दिन में घर तोड़ने की धमकी दी।
इसी धमकी के बाद गुस्सा फूट पड़ा और पाली थाना में धरने पर आदिवासी बैठ गए। ग्रामीणों ने ऐलान कर दिया है कि जब तक SC/ST एक्ट में FIR नहीं होगी, धरना खत्म नहीं होगा।
कांग्रेस भी धरने में आदिवासियों के साथ –
बजरंग पावर के विरोध में आदिवासियों की इस लड़ाई में अब कांग्रेस भी कूद पड़ी है। इस धरने में कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजय कोल अपनी पूरी टीम के साथ धरना स्थल पर पहुंच गए हैं। उनके साथ जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष रवि मिश्रा, संजीव खण्डेलवाल, प्रमोद उपाध्याय , श्रमिक नेता प्रीतम पाठक, जानकी मिश्रा, राम बिहारी उपाध्याय सहित लगभग 50 कांग्रेसी आंदोलन में शामिल होकर आदिवासियों की मांग को मुखर कर रहे हैं। कांग्रेस आदिवासी जिला अध्यक्ष मनीष सिंह बडकरे पहले से ही आदिवासियों के साथ खड़े रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के संरक्षण में कंपनी आदिवासियों की जमीन लूट रही है, उन पर जोर-जबरदस्ती की जा रही है और उल्टा उन्हीं के विरुद्ध मुकदमा करने की तैयारी की जा रही है।
प्रशासन में हड़कंप, उमरिया से पहुंचे एडिशनल एसपी –
पाली में चल रहे इस आंदोलन से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आंदोलनकारियों से बात करने के लिए जिला मुख्यालय उमरिया से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खुद पाली थाना पहुंच गए हैं, लेकिन आंदोलनकारी अपने न्याय और FIR की मांग पर अभी तक अड़े हुए हैं।
अजय पाल







