डिंडौरी मध्यप्रदेश
कलेक्टर को सौंपा आवेदन, रिकॉर्ड खंगालने के साथ निर्माण कार्यों के भौतिक सत्यापन की मांग
शहपुरा। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बिछिया में 10 लाख 65 हजार 619 रुपये के कथित भुगतान का मामला एक बार फिर प्रशासन के सामने पहुंचा है। ग्राम बिछिया निवासी नीरज नामदेव ने मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत आयोजित शिविर में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता ने पंचायत के अभिलेखों की जांच के साथ भुगतान के एवज में कराए गए बताए जा रहे निर्माण कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग उठाई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस मामले में पूर्व में जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन पंचायत से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण जांच पूरी तरह निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। आवेदन में मांग की गई है कि संबंधित अभिलेख जहां भी उपलब्ध हों, उन्हें प्राप्त कर भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
सचिव की बीमारी के कारण रिकॉर्ड नहीं मिलने पर उठाए सवाल
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जांच के दौरान पंचायत सचिव के बीमार होने का हवाला देते हुए रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। शिकायतकर्ता ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सचिव की अनुपस्थिति में भी शासकीय अभिलेखों को संबंधित जिम्मेदार कर्मचारियों के माध्यम से प्राप्त कर जांच कराई जा सकती है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पंचायत से जुड़े अभिलेख सुरक्षित रूप से प्राप्त कर जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं और भुगतान से संबंधित बिल-वाउचर, प्रस्ताव एवं अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए।
बैठक और कार्यवाही रजिस्टर की भी जांच की मांग
आवेदन में ग्राम पंचायत की मासिक बैठकों की कार्यवाही एवं पंचों की उपस्थिति से संबंधित रजिस्टर की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पंचायत की बैठकों में निर्माण कार्यों और भुगतान से जुड़े प्रस्तावों का उल्लेख होता है। ऐसे में कार्यवाही पंजी और उपस्थिति पंजी की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित कार्यों एवं भुगतान को लेकर पंचायत स्तर पर क्या निर्णय लिए गए थे।
10.65 लाख के भुगतान के मुकाबले मौके पर कितना काम?
शिकायत का प्रमुख बिंदु अप्रैल 2026 से अब तक किए गए 10 लाख 65 हजार 619 रुपये के भुगतान का भौतिक सत्यापन है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि भुगतान से जुड़े प्रत्येक निर्माण कार्य की जानकारी निकालकर जांच दल मौके पर पहुंचे और रिकॉर्ड में दर्ज कार्यों का वास्तविक निर्माण से मिलान करे। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जिन कार्यों के नाम पर राशि का भुगतान दर्ज है, वे मौके पर हुए हैं या नहीं और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है।
आवेदन में आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सचिव के अप्रैल 2026 से अब तक के उपचार संबंधी रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग भी की गई है, ताकि बीमारी को लेकर किए गए दावों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने और अनियमितता पाए जाने की स्थिति में संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। साथ ही जांच समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर की गई कार्रवाई से अवगत कराने की मांग भी की गई है। आवेदन में चेतावनी दी गई है कि निष्पक्ष जांच एवं उचित कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वे उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
फिलहाल 10.65 लाख रुपये के कथित फर्जी भुगतान से जुड़े आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। प्रशासनिक जांच, पंचायत अभिलेखों के परीक्षण और मौके पर निर्माण कार्यों के भौतिक सत्यापन के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट अखिलेश झारिया







