प्रदेश के प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञ और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अलख जगाने वाले प्रखर समाजसेवी डॉ. दिनेश मिश्र को चिकित्सा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उनके अप्रतिम और दीर्घकालीन योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से विभूषित किया गया है। राजधानी में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामयी समारोह के दौरान छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने कर-कमलों से डॉ. दिनेश मिश्र को यह सम्मान प्रदान किया।

इस विशेष अवसर पर क्षेत्र की अनेक प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति गरिमामयी रही। कार्यक्रम में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व मंत्री व रायपुर विधायक राजेश मूणत, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर मीनल चौबे, डॉ. विद्याकांत त्रिवेदी, डॉ. उपेन्द्र त्रिवेदी तथा डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी विशेष रूप से उपस्थित रहे और डॉ. मिश्र को इस बड़ी उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं।
अंधविश्वास निर्मूलन और समाज सुधार के आधार स्तंभ
वर्ष 1995 से अनवरत जारी अपने सेवा संकल्प के माध्यम से डॉ. दिनेश मिश्र ने छत्तीसगढ़ में सामाजिक अंधविश्वास, डायन (टोनही) प्रथा और कुरीतियों के विरुद्ध एक ऐतिहासिक जनजागरण अभियान की नींव रखी है। उनके अथक और निस्वार्थ प्रयासों का ही सुखद परिणाम है कि प्रदेश में ‘टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम’ जैसा कड़ा कानून अस्तित्व में आ सका। डॉ. मिश्र ने न केवल प्रताड़ित महिलाओं के कल्याण और पुनर्वास के लिए अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी, बल्कि सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे अनगिनत परिवारों को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भी कानून बनाने हेतु निरंतर संघर्षरत हैं।

मानवता और चिकित्सा सेवा की अनोखी मिसाल
डॉ. दिनेश मिश्र का जीवन एक वरिष्ठ चिकित्सक के रूप में मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। वे अब तक 300 से अधिक निःशुल्क चिकित्सा शिविरों के माध्यम से जरूरतमंदों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इतना ही नहीं, सामाजिक सरोकार की अनूठी मिसाल पेश करते हुए उन्होंने पिछले 35 वर्षों में दीपावली और होली जैसे बड़े त्योहारों के अवसर पर भी 70 से अधिक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर आम जनमानस को राहत पहुंचाई है।
30 वर्षों की निष्काम यात्रा और 5 हजार से अधिक सभाएं
विगत तीन दशकों से जादू-टोने के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाली प्रताड़ना, मानवाधिकार हनन और सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ डॉ. मिश्र की निष्काम यात्रा जारी है। इस महाअभियान के तहत उन्होंने देशभर में 5,000 से भी अधिक जनसभाओं को संबोधित किया है। इसके अतिरिक्त, स्कूल-कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से आयोजित कार्यशालाओं में 3 लाख से अधिक विद्यार्थियों को जागरूक और शिक्षित कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लैस किया है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का गौरव बढ़ाया
डॉ. दिनेश मिश्र की सामाजिक क्रांति की गूंज केवल देश तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने वैश्विक मंचों पर भी भारत का परचम लहराया है। वर्ष 2016 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा जिनेवा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में उन्होंने मानवाधिकार एवं टोनही प्रताड़ना विषय पर अपना ऐतिहासिक वक्तव्य दिया। इससे पूर्व 2014 में बेल्जियम के ब्रसेल्स में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी तथा देश-विदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उनके व्याख्यान आयोजित हो चुके हैं। उनका यह व्यापक अभियान छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, असम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक तक सफलतापूर्वक फैला हुआ है।

राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मानों से सुशोभित
समाज सुधार, वैज्ञानिक सोच के प्रचार-प्रसार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में डॉ. मिश्र के असाधारण योगदान को पूर्व में भी सराहा गया है। उन्हें छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2006 में ‘राज्य अलंकरण पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान’ से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2007 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा उन्हें ‘नेशनल अवार्ड’ प्रदान किया गया, वहीं 2006 में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा महिला उत्पीड़न के खिलाफ उत्कृष्ट कार्यों के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया था।
डॉ. दिनेश मिश्र का संपूर्ण जीवन समाज को अंधविश्वास के अंधकार से निकालकर शिक्षा, स्वास्थ्य और समानता के प्रकाश की ओर ले जाने वाला एक प्रेरणादायी अध्याय है। यह लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड उनके इसी निष्ठापूर्ण समर्पण, मानवीय दृष्टिकोण और समाज सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक अत्यंत योग्य और गौरवशाली सम्मान है।
रिपोर्ट:मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ, पुलिसवाला न्यूज़






