गरियाबंद। जिला शिक्षा अधिकारी के प्रभारी पद को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी कर्मचारी को उच्च पद का प्रभार पाने का स्वतः कानूनी अधिकार नहीं है। प्रभार सौंपते समय योग्यता, अनुभव, प्रशासनिक आवश्यकता और अधिकारी की समग्र उपयुक्तता को ध्यान में रखना सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में है।
मामले में छुरा के प्रभारी BEO किशुन लाल मातावाले ने 10 जून 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनसे कनिष्ठ राजेश चंद्राकर को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी, गरियाबंद बनाया गया था। याचिकाकर्ता ने वरिष्ठता एवं लंबे अनुभव को आधार बनाते हुए प्रभार दिए जाने की मांग की थी।
राज्य शासन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि केवल वरिष्ठता के आधार पर उच्च पद के प्रभार का दावा नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान कलेक्टर की रिपोर्ट में याचिकाकर्ता के कार्यों से जुड़ी कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों का भी उल्लेख हुआ, हालांकि कोर्ट ने इसे कदाचार का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना।
जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ ने कहा कि प्रभारी पदस्थापना एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है और वरिष्ठता अपने आप में प्रभार पाने का पूर्ण अधिकार नहीं देती। न्यायालय को आदेश में कोई ऐसी अवैधता या मनमानी नहीं मिली, जिसके आधार पर हस्तक्षेप किया जाए।
हाई कोर्ट ने याचिका को मेरिट से रहित मानते हुए खारिज कर दिया। आदेश 11 अगस्त 2026 को पारित हुआ।
रिपोर्ट — नेहरू साहू
जिला ब्यूरो, गरियाबंद







