प्राकृतिक सामग्री से तैयार कर रहीं आकर्षक राखियां
11 अगस्त से भूतेश्वरनाथ धाम में लगेगा स्टॉल
आरसेटी से प्रशिक्षण लेकर हुनर को बनाया स्वरोजगार का जरिया, परिवार की आय में हो रही वृद्धि
गरियाबंद, 10 अगस्त 2026/ जिले के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं और बेटियां अब पारंपरिक खेती-किसानी के साथ-साथ अपनी रचनात्मकता और हुनर को आय का जरिया बना रही हैं। जिले के ग्राम सढ़ौली की बेटियां एवं दीदियां रुरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरसेटी) से प्रशिक्षण लेकर राखी निर्माण का कार्य कर रही हैं। खेतों में कामकाज के बाद प्रतिदिन 2 से 3 घंटे समय निकालकर वे आकर्षक और पारंपरिक राखियां तैयार कर रही हैं। जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। इन महिलाओं द्वारा धान, सेमी, मूंगा, मटर, झुर्गा बीज, रहर दाल और चावल जैसी स्थानीय एवं प्राकृतिक सामग्री का उपयोग कर आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं। इसके साथ ही राजधानी रायपुर एवं दुर्ग से कच्चा माल मंगाकर धागे, स्टोन, सजावटी मोतियों और फैब्रिग्लू की सहायता से भी विभिन्न डिजाइन की राखियां बनाई जा रही हैं।

राखी निर्माण से जुड़ी गुंजा धु्रव, भोजेश्वरी धु्रव, योगिता कश्यप, मोनिका कश्यप, लिलेश्वरी कश्यप, कांति कश्यप, सरिता धु्रव, चमेली धु्रव, अनुरूपा साहू और जयंती पटेल सहित अन्य सदस्य इस कार्य में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। गुंजा धु्रव ने बताया कि समूह द्वारा तैयार की गई राखियों की बिक्री के लिए 11 अगस्त से भूतेश्वरनाथ धाम में स्टॉल लगाया जाएगा। महिलाओं ने राखियों को आकर्षक रेडीमेड डिब्बों में स्वयं पैक करने की व्यवस्था भी की है। इससे उत्पाद को बेहतर रूप देने के साथ बाजार में विक्रय करेंगी।
इन महिलाओं द्वारा खेती-किसानी और घरेलू कार्यों के बीच अपने खाली समय का सदुपयोग करते हुए प्रतिदिन अपना 2 से 3 घंटे का समय राखी निर्माण में लगा रही हैं। इस छोटे से प्रयास से वे अपनी मेहनत और हुनर को आर्थिक गतिविधि से जोड़कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सढ़ौली की इन महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों, प्रशिक्षण और मेहनत के सहारे गांव की महिलाएं अपने हुनर को स्वरोजगार में बदल रही हैं। खेती के साथ छोटे-छोटे घरेलू उद्यमों को अपनाकर वे आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं और परिवार की आय में भी बढ़ेत्तरी कर रही हैं।
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो पुलिस वाला न्यूज गरियाबंद







