डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
शहपुरा (डिंडौरी)। शहपुरा विकासखंड के ग्राम चरगांव में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन सांदीपनि विद्यालय के छात्रावास भवनों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों के लिए बनाए जा रहे 100-100 सीटर एवं 50 सीटर छात्रावासों के निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, चरगांव में जिले का सबसे बड़ा सीएम राइज विद्यालय लगभग दो वर्ष पहले बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन अब तक संचालन शुरू नहीं हो सका है। विद्यालय में दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए पुलिस हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से दो 100 सीटर और एक 50 सीटर छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है। वर्तमान में 100 सीटर क्षमता वाले दो छात्रावास का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर गुणवत्ता संबंधी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि बेस बीम की ढलाई में गिट्टी के स्थान पर ईंटों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा कॉलम और बीम में निर्धारित मानकों के अनुरूप स्टील का उपयोग नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य पिछले तीन माह से जारी है, लेकिन स्थल पर न तो किसी तकनीकी अधिकारी की नियमित मौजूदगी दिखाई देती है और न ही गुणवत्ता की निगरानी होती नजर आती है। निर्माण स्थल पर बनाई गई परीक्षण प्रयोगशाला (लैब) भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। वहां रखी मशीनें अब तक संचालित नहीं की गई हैं, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सूचना पटल नहीं, पारदर्शिता पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे शासकीय निर्माण कार्य के बावजूद अब तक निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना पटल नहीं लगाया गया है। जबकि नियमों के अनुसार सूचना पटल पर परियोजना की लागत, निर्माण एजेंसी, स्वीकृति, समय-सीमा और विभागीय जानकारी प्रदर्शित करना आवश्यक होता है।
गांव के मूरत और भोलू ने बताया कि यदि सूचना पटल लगाया जाता तो ग्रामीणों को भी निर्माण कार्य की लागत और निर्धारित मानकों की जानकारी मिलती। उनका कहना है कि निर्माण कार्य लेंटर स्तर तक पहुंच गया है, फिर भी सूचना पटल का नहीं लगाया जाना पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। हालांकि एजेंसी के कर्मचारियों ने ग्रामीणों को बताया कि सूचना पटल तैयार है और जल्द लगाया जाएगा।
डैम का पानी उपयोग करने पर भी आपत्ति
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य के लिए पानी की व्यवस्था एजेंसी को स्वयं करनी थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा गांव के डैम का पानी उपयोग किया जा रहा है। इस पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि डैम का पानी गांव की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है और इसका निर्माण कार्य में उपयोग स्थानीय लोगों के हितों के विपरीत है।
निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन तथा पुलिस हाउसिंग बोर्ड से निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन की गुणवत्ता, स्टील की मात्रा, ड्राइंग-डिजाइन, निर्माण सामग्री और लागत की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।







