*औषधि विभाग की निष्क्रियता: कटनी में ताबड़तोड़ कार्रवाई, शहडोल में नियमों को ठेंगा दिखा रहे मेडिकल स्टोर्स*
शहडोल। पड़ोसी जिले कटनी में कलेक्टर के निर्देश पर औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले 10 मेडिकल स्टोर्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर हड़कंप मचा दिया है। वहीं दूसरी ओर, शहडोल जिले का औषधि प्रशासन विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। जिले में बिना फार्मासिस्ट और बिना वैध पर्ची के धड़ल्ले से प्रतिबंधित दवाइयां बेची जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
*नियमों की उड़ रही धज्जियां, जिम्मेदार मौन*
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति में होनी चाहिए। शहडोल के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों (जैसे बुढ़ार, धनपुरी, जयसिंहनगर) में अधिकांश मेडिकल स्टोर्स बिना फार्मासिस्ट के ही संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा, अनुसूची एच, एच-1 और एक्स (Schedule H, H1 & X) श्रेणी की नशीली और घातक दवाएं बिना किसी डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के खुलेआम बेची जा रही हैं, जिनका रिकॉर्ड भी संधारित नहीं किया जा रहा है। ग्राहकों को न तो उचित कैश मेमो दिया जा रहा है और न ही दवाओं के रखरखाव व फ्रीज के तापमान का ध्यान रखा जा रहा है।
*कब जागेगा शहडोल का प्रशासन?*
बड़ा सवाल: जब कटनी प्रशासन जनहित में मुस्तैदी दिखाते हुए लाइसेंस निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई कर सकता है, तो शहडोल का औषधि विभाग किसी बड़े हादसे या शिकायत का इंतजार क्यों कर रहा है?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विभाग के ढीले रवैये के कारण ही मेडिकल स्टोर संचालक मनमानी कर रहे हैं। शहडोल कलेक्टर को भी कटनी की तर्ज पर औचक निरीक्षण के निर्देश देने चाहिए, ताकि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे इन अवैध दवा कारोबारियों पर शिकंजा कसा जा सके।
*अजय पाल*







