खाकी का मानवीय चेहरा: आरक्षक निखिल श्रीवास्तव ने रक्तदान कर बचाई महिला की जान, एसपी ने किया पुरस्कृत
शहडोल। ‘अपराधियों में डर और आम जन में विश्वास’ के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए शहडोल पुलिस के एक जवान ने इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की है। जिला मुख्यालय में तैनात पुलिस आरक्षक निखिल श्रीवास्तव ने समय पर रक्तदान कर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही एक महिला की जान बचाई है। उनके इस सराहनीय और संवेदनशील कार्य की पूरे क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है।
सोशल मीडिया पर देखी थी मदद की अपील
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंपा सेन नामक एक महिला गंभीर बीमारी के चलते जिला चिकित्सालय शहडोल में भर्ती थीं। उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी और शरीर में प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहे थे। महिला के परिजन ब्लड बैंक और डोनर्स के लिए दर-दर भटक रहे थे, लेकिन उन्हें कोई डोनर नहीं मिल पा रहा था। थक-हारकर परिजनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से रक्तदान करने की भावुक अपील की।
ड्यूटी के साथ निभाया सामाजिक दायित्व
जैसे ही सोशल मीडिया पर चल रही यह अपील आरक्षक निखिल श्रीवास्तव की नजरों से गुजरी, उन्होंने बिना एक पल गंवाए अस्पताल पहुंचने का फैसला किया। उन्होंने तुरंत जिला ब्लड बैंक पहुंचकर स्वेच्छा से रक्तदान किया। आरक्षक के इस त्वरित सहयोग के कारण महिला को समय पर इलाज मिल सका और उसकी जान बच गई। इस संकट की घड़ी में देवदूत बनकर आए पुलिस जवान का महिला के परिजनों ने हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया है।
पुलिस अधीक्षक ने नकद पुरस्कार से नवाजा
आरक्षक निखिल श्रीवास्तव की इस मानवीय और प्रेरणादायक पहल की जानकारी जब उच्च अधिकारियों तक पहुंची, तो विभाग का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया। पुलिस अधीक्षक (SP) शहडोल ने आरक्षक की कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशीलता की खुले दिल से प्रशंसा की। उन्होंने निखिल श्रीवास्तव के इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें तत्काल नकद पुरस्कार से पुरस्कृत कर सम्मानित किया। सचमुच, खाकी के इस रूप ने समाज में पुलिस की छवि को एक नया गौरव दिया है।
अजय पाल







