ग्रीष्मकालीन अवकाश में हुनर निखार रहे बच्चे; संगीत, डांस और आर्ट-क्राफ्ट की धूम
शहडोल। वर्तमान समय में जहाँ तकनीक और स्क्रीन का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं बच्चों को रचनात्मकता से जोड़ने की पहल रंग ला रही है। स्थानीय ‘संगीत विद्यालय’ में आयोजित समर क्लासेस में बच्चों की रुचि लगातार बढ़ती जा रही है। मोबाइल और इंटरनेट के इस दौर में बच्चों को मानसिक रूप से सक्रिय रखने के लिए उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना बेहद आवश्यक हो गया है।
इसी उद्देश्य के साथ संचालित संगीत की कक्षाओं में बच्चे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। यहाँ बच्चे न केवल गायन, बल्कि पियानो, तबला, और डांस (कथक) जैसी शास्त्रीय एवं आधुनिक विधाओं का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके साथ ही ड्राइंग और क्राफ्ट की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशीलता को नए पंख मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत और कला बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य हैं। यह बच्चों में:
आत्मविश्वास बढ़ाता है।
एकाग्रता में सुधार लाता है।
मानसिक विकास और रचनात्मक सोच को गति देता है।
अभिभावकों का बदलता नजरिया
संस्थान की संचालिका श्रीमती वसुधा मिश्रा ने बताया कि अब अभिभावकों की सोच में भी सकारात्मक बदलाव आया है। वे अब बच्चों को केवल किताबी पढ़ाई तक सीमित न रखकर उनकी आंतरिक प्रतिभा को निखारने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
सीख रहे बच्चों का कहना है कि उन्हें पियानो, तबला और गायन सीखने में काफी आनंद आ रहा है। यह समर कैंप उनके लिए छुट्टियों का सबसे यादगार हिस्सा बन गया है।
स्थान: संगीत विद्यालय, पुरानी बस्ती, सत्यम वीडियो चौक, शहडोल।
प्रस्तुति: श्रीमती वसुधा मिश्रा (संचालिका)
अजय पाल







