शहडोल मध्यप्रदेश
डिजिटल डकैती: सगे भरोसे का कत्ल कर हड़पे 4.85 लाख, शहडोल पुलिस ने जालसाज को जबलपुर स्टेशन से दबोचा
ब्यौहारी/शहडोल: आज के डिजिटल युग में मोबाइल और यूपीआई (UPI) सुविधा जितनी आसान है, जरा सी चूक उसे उतनी ही खतरनाक बना देती है। ताजा मामला शहडोल जिले के ब्यौहारी थाने से सामने आया है, जहाँ एक जालसाज ने एक महिला के बैंक खातों में सेंध लगाकर करीब 5 लाख रुपये डकार लिए। हालांकि, आरोपी की चालाकी ज्यादा दिन नहीं चली और शहडोल पुलिस ने उसे जबलपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
भरोसे की आड़ में ‘डिजिटल हाथसाफ’
मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम ब्यौहारी निवासी निर्मला पटेल ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के मुताबिक, उसके दो अलग-अलग बैंकों (एसबीआई और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया) से कुल 4,85,307 रुपये गायब थे। चौंकाने वाली बात यह थी कि ये पैसे बिना उसकी जानकारी के धोखाधड़ी से यूपीआई के जरिए ट्रांसफर किए गए थे।
जब पीड़िता ने बैंक स्टेटमेंट निकलवाया, तो सच सामने आया। जबलपुर निवासी अभिराज साहू ने बड़ी सफाई से पीड़िता के खातों से पैसे उड़ाए थे। यह साफ तौर पर भरोसे का कत्ल और आधुनिक युग की ‘डिजिटल डकैती’ थी।
साइबर सेल की मदद से बिछाया गया जाल
रिपोर्ट दर्ज होते ही ब्यौहारी पुलिस एक्शन मोड में आ गई। आरोपी अभिराज साहू घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए शहडोल पुलिस की साइबर सेल को काम पर लगाया गया। तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन को ट्रैक करते हुए पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी जबलपुर में छिपा है।
घेराबंदी करते हुए पुलिस टीम ने 29 मार्च 2026 को आरोपी अभिराज साहू को जबलपुर रेलवे स्टेशन से उस वक्त गिरफ्तार कर लिया, जब वह भागने की फिराक में था।
पुलिस टीम की रही सराहनीय भूमिका
इस सफल कार्रवाई में ब्यौहारी थाना प्रभारी निरीक्षक जियाउल हक के नेतृत्व में उपनिरीक्षक वीरेंद्र तिवारी, आरक्षक सागर गुप्ता, पंकज सिंह और महिला आरक्षक माधुरी साहू की मुख्य भूमिका रही। साइबर सेल शहडोल के तकनीकी सहयोग ने इस केस को सुलझाने में रीढ़ की हड्डी का काम किया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (B.N.S.) और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया है।
चेतावनी: यह घटना उन सभी के लिए एक सबक है जो अपना मोबाइल या बैंक संबंधी जानकारी दूसरों के साथ साझा करते हैं। सतर्क रहें, क्योंकि आपका एक छोटा सा ‘ओटीपी’ या ‘यूपीआई पिन’ किसी की नीयत बिगाड़ सकता है।
अजय पाल







