परीक्षा सुपरिटेंडेंट की परीक्षा में कसावट या आशिकी का भूत सवार
कटनी मध्य प्रदेश
परीक्षा के समय देखा जाए तो शिक्षा विभाग अनेकों मामले सामने आ रहे है कही शिक्षिका द्वारा परीक्षा का पर्चा ही स्टेटस में लगा लिया गया उसके बाद विभाग हरकत में आया और निलंबन की कार्यवाही की ऐसा एक विद्यालय न नहीं हो रहा है जिसमें परीक्षा को मजाक बनाकर रखा गया है कही का मामला उजागर हो जाता है तो कही मामले दवा दिए जाते है क्योंकि मोबाइल प्रतिबंधित होने के बाद भी मोबाइल परीक्षा का पर्चा आना निर्देशों पर सवाल खड़े करने जैसी बात है जो पर्चा स्टेटस में लग सकता है वह परीक्षा केंद्र के बाहर भी शेयर किया गया होगा इन कार्यों में कोई ग्रामीण या की छात्र-छात्राओं के अभिभावक शामिल नहीं होते बल्कि विद्यालय के शिक्षकों द्वारा ही है काम किया जाता है अनेकों मामले में कहीं केंद्र अध्यक्ष की मर्जी से ऐसे परीक्षा पर्यवेक्षक लगाए जाते हैं जो नियमावली में नहीं है हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के शिक्षकों को परीक्षा में पर्यवेक्षक बनाना नियम विरुद्ध है लेकिन परीक्षा केंद्र अध्यक्ष नियमों की धज्जियां उड़ाकर अपने रिश्तेदारों एवं रिश्तेदारी निभाते हुए परीक्षा में अपात्र शिक्षकों को पर्यवेक्षक बनाते हैं तो कहीं केंद्र अध्यक्ष का छात्रों से ऐसा लगा शासन परीक्षा निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है
एक नजर ढीमरखेड़ा पर
इन दिनों ढीमरखेड़ा क्षेत्र में शिक्षा विभाग के कारनामे लगातार सामने आ रहे हैं कहीं विद्यालय में फूहड़ गाने बजाए जाते हैं तो कहीं शिक्षकों द्वारा वह कार्य किया जा रहा है जो समाज में सदैव नींदनीय रहा एक परीक्षा के केंद्र अध्यक्ष द्वारा खासकर कक्षा 12वीं की परीक्षा में नकल पर नकेल कसी गई है इनके द्वारा परीक्षा में ऐसी कसावट की गई है कि कोई भी बच्चा नकल न कर पाए और अपने पढ़ाई दे दम पर पास ही सके
बोर्ड परीक्षा में निष्पक्षता और नकल पर लगाम लगाना केंद्र अध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है इसलिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दूसरे ब्लाकों के विद्यालय के शिक्षकों को केंद्राध्यक्ष बनाया जाता है जिससे पक्षपात न हो सके और न ही क्षेत्रीय स्तर पर नकल के लिए सांठ गांठ न हो सके लेकिन परीक्षा केंद्र अध्यक्ष द्वारा यह काम अपने नियमों के तहत नहीं बल्कि आशिकी के चक्कर में किया जाए तो चर्चाएं तो होंगी
और परीक्षा केंद्राध्यक्षों को बचना भी चाहिए कि उनकी निष्पक्षता पर सवाल न खड़े हो सके और किसी भी से ऐसा लगाव न बन जाए कि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो खासकर किसी भी छात्र से तो लगाव नहीं होना चाहिए जिसके केंद्र में आप केंद्राध्यक्ष बनकर आए है
छात्र में कोई भी हो सकता है छात्र या छात्रा
चर्चाओं और सूत्रों की माने और मिली जानकारी के अनुसार एक केंद्राध्यक्ष को कक्षा 12वीं के बच्चे से लगाव हो गया है लगाव कैसा है पता नहीं पर निष्पक्षता पर तो सवाल खड़े होंगे क्योंकि किसी से लगाव और उसकी मंशा को पूर्ण करने के लिए परीक्षा में कसावट रखी गई है जिससे नकल ना हो सके और उस छात्र बस का भविष्य उज्जवल हो सके बहरहाल परीक्षा में व्यवस्थाएं ऐसी ही होना चाहिए की नकल एवं अन्य प्रकार का चीटिंग जैसी बात सामने ना आए नकल का पान तो सब खाना चाहते है पर असली पान तो चौरसिया जी लोग ही अच्छा खिलाते है अब देखने लायक बात है कि केंद्र अध्यक्ष द्वारा ऐसी कसावट शासन
प्रशासन के निर्देशन को पालन में किया जा रहा है या फिर आशिकी का भूत सवार है
सौरभ गर्ग ब्यूरो कटनी

