डिंडौरी मध्यप्रदेश

शहपुरा (डिंडौरी)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मध्य प्रदेश द्वारा 15वें वित्त आयोग योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के उद्देश्य से स्वीकृत उप स्वास्थ्य केंद्र भवनों के निर्माण में गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम करौंदी में लगभग 65 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन उप स्वास्थ्य केंद्र भवन में ग्रामीणों ने व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाया है। वहीं विभागीय निरीक्षण में भी कई तकनीकी खामियां सामने आने के बावजूद निर्माण कार्य में सुधार नहीं किया गया।
खबर की प्रमुख बातें
बीम झुकी, कॉलम में आई दरारें: निर्माणाधीन भवन के कई कॉलमों में दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कुछ बीम झुकी हुई नजर आईं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की स्थिति भवन की मजबूती और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कंक्रीट में दिखा हनीकॉम्ब: निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर कंक्रीट में हनीकॉम्ब (Honeycomb) जैसी स्थिति पाई गई, जो मानकों के अनुरूप निर्माण न होने और गुणवत्ता में कमी का संकेत मानी जाती है।
घटिया निर्माण सामग्री के आरोप: ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण में निम्न गुणवत्ता की ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही रेत और सीमेंट भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं लगाया जा रहा है।
सरियों की कमी का आरोप: स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पर्याप्त सरिया नहीं लगाया गया, जिसके कारण पिलर और बीम की मजबूती प्रभावित हुई है।
विभागीय निरीक्षण में पहले भी मिली थीं कमियां: स्वास्थ्य विभाग के सब इंजीनियर द्वारा 29 मई 2026 को किए गए निरीक्षण में निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने, सीसी कार्य की गुणवत्ता सहित कई कमियां पाई गई थीं। ठेकेदार को मौखिक रूप से सुधार के निर्देश दिए गए थे।
दोबारा निरीक्षण में भी नहीं हुआ सुधार: 14 जुलाई 2026 को पुनः निरीक्षण करने पर विभाग ने पाया कि ठेकेदार ने पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद तकनीकी निरीक्षण प्रतिवेदन जारी कर कमियों का उल्लेख किया गया।
अधिकारियों की निगरानी पर सवाल: ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार मनमाने तरीके से निर्माण कार्य करा रहा है और विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही। ग्रामीणों ने ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग: ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराकर दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
लगातार दो विभागीय निरीक्षणों में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने और उनके बावजूद सुधार नहीं होने से निर्माण कार्य की पारदर्शिता और विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग तकनीकी प्रतिवेदन के आधार पर ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

