ग्राम पंचायत बुधनवारा में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
🖋️ अंत्येष्टि सहायता में फर्जीवाड़ा, एक ही बिल तीन बार लगाकर निकाली गई राशि
कटनी
कटनी जिले की जनपद पंचायत बहोरीबंद की ग्राम पंचायत बुधनवारा में अंत्येष्टि सहायता योजना के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जिसने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक ही अंत्येष्टि सहायता बिल को तीन बार प्रस्तुत कर शासन की राशि का गबन किया गया। यह मामला न केवल नियमों की खुली अवहेलना को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि जिम्मेदार अधिकारी किस तरह सरकारी योजनाओं को निजी लाभ का माध्यम बना रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंत्येष्टि सहायता योजना के तहत गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य यह है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार में परेशानी न हो। लेकिन बुधनवारा ग्राम पंचायत में इस संवेदनशील योजना को ही भ्रष्टाचार का जरिया बना लिया गया।
एक बिल, तीन भुगतान कैसे हुआ खेल
सूत्रों के अनुसार, पंचायत में 5 मृतक के नाम पर अंत्येष्टि सहायता के लिए बिल तैयार किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसी बिल को तीन बार प्रस्तुत कर भुगतान निकाल लिया गया। दस्तावेजों की प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि बिल की राशि, मृतक का नाम, और अन्य विवरण लगभग समान हैं, लेकिन भुगतान अलग-अलग प्रविष्टियों में दर्शाया गया है। यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया प्रतीत होता है, जिसमें पंचायत के जिम्मेदार कर्मचारियों और संभवतः कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। सवाल यह उठता है कि जब हर भुगतान के लिए सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया होती है, तो फिर एक ही बिल तीन बार कैसे पास हो गया?
नियमों को ताक पर रखकर निकाली गई राशि
सरकारी योजनाओं में भुगतान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होते हैं। प्रत्येक लाभार्थी के लिए अलग आवेदन, सत्यापन, और दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होती है। इसके बावजूद बुधनवारा पंचायत में इन नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। न तो उचित जांच की गई और न ही दस्तावेजों का मिलान किया गया। इस तरह की अनियमितता बिना मिलीभगत के संभव नहीं है। पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका इस मामले में संदेह के घेरे में है। जैसे ही यह मामला सामने आया, ग्रामवासियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीबों के हक की राशि को इस तरह हड़पना बेहद शर्मनाक है।कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में पहले भी इस तरह के फर्जीवाड़े होते रहे हैं, लेकिन कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर उठता है। यदि समय-समय पर पंचायत के खातों का ऑडिट और निरीक्षण सही तरीके से होता, तो इस तरह की गड़बड़ी को रोका जा सकता था। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि या तो निरीक्षण में लापरवाही बरती गई, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं।
क्या कहते हैं नियम, प्रावधान
अंत्येष्टि सहायता योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को एक बार ही सहायता राशि दी जाती है। इसके लिए मृतक का प्रमाण, परिवार की स्थिति, और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाती है। एक ही व्यक्ति के नाम पर बार-बार भुगतान करना स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है और यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
संभावित कार्रवाई, जांच की उठी मांग
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया जा सकता है। सरकारी धन के गबन के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें जेल और आर्थिक दंड दोनों शामिल हैं।
🖋️ पुलिस वाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट
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