शहडोल मध्यप्रदेश
सहाब मांग रहे 50 हजार की रिश्वत क्या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा एक महिला का न्याय
शहडोल। मध्य प्रदेश में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावों की जमीनी हकीकत शहडोल में तार-तार होती नजर आ रही है। यहां एक बेबस महिला अपनी ही पुश्तैनी जमीन के सीमांकन के लिए दफ्तरों की धूल फांक रही है, लेकिन पटवारी और राजस्व निरीक्षक (RI) बिना ‘रिश्वत’ की भेंट चढ़ाए फाइल हिलाने को तैयार नहीं हैं।
रिश्वत की खुली मांग, प्रशासन मौन
पूरा मामला सोहागपुर तहसील के ग्राम गोरतरा का है। वार्ड नंबर 39, पुरानी बस्ती निवासी सरिता वर्मन ने शहडोल संभाग आयुक्त को सौंपे अपने शिकायती पत्र में राजस्व विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि राजस्व निरीक्षक भास्कर दत्त गौतम और पटवारी विपुल सिंह द्वारा जमीन के सीमांकन के एवज में खुलेआम 50,000 रुपये की मांग की जा रही है।
तहसीलदार के आदेश को भी ठेंगा
सरिता वर्मन ने बताया कि उन्होंने नवंबर 2025 में लोक सेवा केंद्र के माध्यम से सीमांकन का आवेदन दिया था। दिसंबर 2025 में तहसीलदार ने टीम गठित कर सीमांकन के निर्देश भी जारी किए, लेकिन आरआई और पटवारी ने सिस्टम को अपनी जेब में रख लिया है। सूचना पत्र जारी होने के बाद भी महीनों से सीमांकन लटकाया जा रहा है। अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर थक चुकी पीड़िता ने अब प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है।
जनसुनवाई भी साबित हुई बेअसर
पीड़िता ने अपने पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया है कि इससे पूर्व वे जनसुनवाई में भी शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के आगे उनकी आवाज दबकर रह गई। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद निचले स्तर के कर्मचारी आम जनता को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
दंडात्मक कार्यवाही की मांग
सरिता वर्मन ने संभाग आयुक्त से मांग की है कि इन भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ पदीय कर्तव्यों के विपरीत आचरण करने पर सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाए और जल्द से जल्द उनकी भूमि का सीमांकन कराया जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शहडोल प्रशासन इन ‘रिश्वतखोर’ कारिंदों पर नकेल कसेगा या फिर एक गरीब महिला को अपनी ही जमीन के हक के लिए ऐसे ही दर-दर भटकना पड़ेगा?
अजय पाल







