रिपोर्ट अखिलेश झारिया 

डिंडोरी  जिले की शहपुरा जनपद पंचायत पिछले 8 महीनों से बिना मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के चल रही है, जिससे पूरे क्षेत्र का प्रशासनिक ढांचा लगभग पंगु हो चुका है। तत्कालीन सीईओ अरविंद बोरकर के तबादले के बाद अब तक किसी नए अधिकारी ने पदभार ग्रहण नहीं किया है। नतीजतन पंचायत के विकास कार्य ठंडे बस्ते में चले गए हैं और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

जनपद क्षेत्र के सरपंचों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सीईओ के अभाव में काम कछुआ चाल से चल रहे हैं। छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी उन्हें शाहपुरा एसडीएम ऐश्वर्या वर्मा के पास जाना पड़ता है, जिन पर पहले से ही कई विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में पंचायत से जुड़े कार्यों को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा, जिससे फाइलें लंबित होती जा रही हैं। वहीं, वित्तीय प्रभार डिंडोरी के सीईओ के पास होने के कारण भुगतान प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

 

स्थिति यह है कि ग्रामीण विकास, नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई महत्वपूर्ण योजनाएं लगभग ठप पड़ गई हैं। पंचायत स्तर पर सड़क, नाली और पेयजल जैसे मूलभूत कार्य भी अधर में लटके हुए हैं। इससे गांवों में विकास की रफ्तार पूरी तरह थम गई है और लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

 

प्रशासनिक अव्यवस्था के गंभीर असर:

स्थायी सीईओ की अनुपस्थिति ने पंचायत की कार्यप्रणाली को बुरी तरह प्रभावित किया है। नीतिगत निर्णय लेने में देरी हो रही है, नई योजनाओं की मंजूरी अटक रही है और बजट आवंटन में तकनीकी अड़चनें सामने आ रही हैं। प्रभारी अधिकारियों के पास अतिरिक्त जिम्मेदारियां होने के कारण वे पंचायत के कार्यों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।

 

भ्रष्टाचार के आरोप और अनुशासनहीनता:

सीईओ के न होने से सरपंच और सचिवों के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। कई जगहों पर फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आ रहे हैं। प्रशासनिक पकड़ कमजोर होने से कार्यालयीन अनुशासन भी ढीला पड़ गया है, जिससे कामों में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

जनता बेहाल, भरोसा डगमगाया:

ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए बार-बार जनपद पंचायत के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी के अभाव में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा। इससे लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है।

 

आखिर कब तक शहपुरा जनपद पंचायत बिना सीईओ के चलती रहेगी? क्या प्रशासन इस गंभीर स्थिति पर जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा या विकास कार्य यूं ही ठप पड़े रहेंगे?

डिंडौरी मध्यप्रदेश 

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