शहडोल मध्यप्रदेश
शहडोल। जिले में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर प्लांट्स के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर प्रशासन अन्य जिलों में अवैध प्लांट्स पर कार्रवाई कर रहा है, वहीं शहडोल में संचालित निजी वाटर प्लांट्स की वैधानिक स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की निष्क्रियता अब चर्चा का विषय बनती जा रही है।
जानकारी के अनुसार जिले में करीब 8 से 10 निजी पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर प्लांट संचालित हो रहे हैं। लेकिन इन प्लांट्स के पास वैध मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस है या नहीं, यह आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। खाद विभाग द्वारा न तो कभी इनकी सूची जारी की गई और न ही इनके संचालन की वैधता को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये प्लांट्स निर्धारित मानकों के अनुसार पानी का उत्पादन कर रहे हैं या फिर केवल पंजीयन के नाम पर अवैध रूप से कारोबार चल रहा है। भारत सरकार के नियमों के तहत पैकेज्ड पानी का नियमित गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य है, लेकिन जिले में इस नियम के पालन की स्थिति पूरी तरह अस्पष्ट बनी हुई है।
खाद विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल:
क्या जिले में संचालित सभी वाटर प्लांट्स के पास वैध निर्माण लाइसेंस है?
क्या खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं या केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं?
क्या पानी की गुणवत्ता का समय-समय पर परीक्षण कराया जा रहा है?
अब तक कितने प्लांट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई?
क्या विभाग को इन प्लांट्स की जानकारी नहीं है या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बिना अनुमति के प्लांट संचालित हो रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल जांच कर स्पष्ट करे कि जिले में बिक रहा पैकेज्ड पानी सुरक्षित है या नहीं।
कार्रवाई की मांग तेज
अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन विशेष अभियान चलाकर सभी वाटर प्लांट्स की जांच करे, उनकी वैधता सार्वजनिक करे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। साथ ही खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए कि आखिर अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।
अजय पाल
