डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
सुरक्षा श्रमिक मद से भुगतान और रेंज कार्यालय में तैनाती पर आपत्ति, DOPT के नियमों के उल्लंघन का दावा
शहपुरा। वन परिक्षेत्र शहपुरा सामान्य वन मंडल डिंडौरी में वनों की सुरक्षा के लिए रखे जाने वाले सुरक्षा श्रमिकों की नियुक्ति और भुगतान व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि वन सुरक्षा के लिए निर्धारित सुरक्षा श्रमिक मद से एक सेवानिवृत्त वनरक्षक को भुगतान कर सुरक्षा श्रमिक के रूप में रखा गया है, जबकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति को लेकर शासन के निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग में वनों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा श्रमिकों को लगाया जाता है और उनका भुगतान सुरक्षा श्रमिक मद से किया जाता है। आरोप है कि वन परिक्षेत्र शहपुरा अंतर्गत एक सेवानिवृत्त वनरक्षक को इसी मद से भुगतान किया जा रहा है। इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी को सुरक्षा श्रमिक के रूप में किस नियम और किस सक्षम अधिकारी की अनुमति के आधार पर रखा गया है।
रेंज कार्यालय में तैनाती पर भी सवाल
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित सेवानिवृत्त वनरक्षक को वन सुरक्षा के मैदानी कार्य में लगाने के बजाय रेंज कार्यालय में कार्य कराया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस मद की राशि वन सुरक्षा के लिए श्रमिकों पर खर्च की जानी है, उससे भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से कार्यालयीन कार्य कराया जाना नियमों के अनुरूप है या नहीं।
पुनर्नियुक्ति के नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के नियमों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति केवल निर्धारित प्रक्रिया और विशेष परिस्थितियों में ही की जा सकती है। ऐसे में शहपुरा रेंज में की गई उक्त व्यवस्था की प्रशासनिक स्वीकृति, नियुक्ति प्रक्रिया और भुगतान के आधार की जांच की मांग उठ रही है।
जांच हुई तो सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित सेवानिवृत्त वनरक्षक को किस आदेश के तहत सुरक्षा श्रमिक के रूप में रखा गया, भुगतान किस मद से और किसकी स्वीकृति से किया जा रहा है तथा उनसे वास्तव में कौन-सा कार्य कराया जा रहा है। विभागीय स्तर पर अभिलेखों और भुगतान की जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि व्यवस्था नियमानुसार है या नियमों की अनदेखी की गई है।







