शहडोल। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में 8-9 अगस्त 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय पश्चिम क्षेत्रीय सम्मेलन “Enhancing Access to Justice” संपन्न हुआ। इस राष्ट्रीय मंच पर शहडोल जिले के ग्राम सिंहपुर निवासी पैरा लीगल वालंटियर (PLV) प्रकाश राव ने जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए बाल संरक्षण और विधिक जागरूकता के अपने जमीनी अनुभवों को साझा किया।WhatsApp Image 2026 08 11 at 15.25.47 scaled

एकजुट आवाजें, सशक्त भविष्य की थीम पर मंथन​सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य

“एकजुट आवाजें, सशक्त भविष्य—संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच” के तहत समाज के वंचित और कमजोर वर्गों तक सुलभ, त्वरित और सम्मानजनक विधिक सहायता पहुंचाना रहा।
​कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं NALSA के संरक्षक-प्रमुख न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस दौरान केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश मौजूद रहे। सम्मेलन में NALSA की नई योजनाओं, ब्रेल गाइड, सांकेतिक भाषा में थीम सॉन्ग और मध्यस्थता से जुड़ी पहलों का विमोचन भी किया गया।

राष्ट्रीय मंच पर गूंजी शहडोल की आवाज

​सम्मेलन के तकनीकी सत्र-III “हर बच्चा मायने रखता है: बाल-हितैषी न्याय, संरक्षण और पुनर्वास को मजबूत बनाना” में PLV प्रकाश राव ने अपना प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और परिवारों के बीच कानूनी जानकारी का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
​उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया:
​जागरूकता व समन्वय: दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंद बच्चों को समय पर विधिक सहायता दिलाना और समुदाय व बाल संरक्षण संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना।
​संवेदनशीलता व पुनर्वास: बाल अपराधों व शोषण से जुड़े मामलों में बच्चे की गरिमा की रक्षा, संवेदनशील व्यवहार, त्वरित कानूनी मदद और पुनर्वास को प्राथमिकता देना।
​मध्यस्थता, आदिवासी अधिकार और जेल सुधार पर चर्चा
​दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान न्याय प्रणाली को अधिक समावेशी बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:
​आदिवासी व वनवासी अधिकार: खानाबदोश व गैर-अधिसूचित जनजातियों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना।
​मध्यस्थता व सामुदायिक समाधान: अदालतों से बाहर विवादों के निपटारे के लिए समावेशी भागीदारी को बढ़ावा देना।
​कैदियों का पुनर्वास: सत्र-IV में कैदियों के अधिकारों, जेल लोक अदालत, परिवार पुनर्मिलन, कौशल विकास और समाज में उनके पुनर्समावेशन पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
​शीर्ष नेतृत्व का संदेश: गरिमा और संवाद ही न्याय का आधार
​न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्याय मांगने आए व्यक्ति के साथ संवेदनशीलता और सम्मानजनक संवाद ही सुलभ न्याय की पहली शर्त है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राज्य के हर नागरिक तक न्याय को सरल और सुगम बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

जिले के लिए गौरव का क्षण

​एक ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के विधिक मंच पर जमीनी अनुभव प्रस्तुत करना शहडोल जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है। प्रकाश राव की यह सहभागिता ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे पैरा लीगल वालंटियर्स (PLV) के महत्व और योगदान को रेखांकित करती है।

अजय पाल

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