रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नरी प्रणाली प्रभावी रूप से लागू हो गई है। इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद पुलिस की बदली हुई कार्यप्रणाली और उसे प्राप्त हुए नए कानूनी अधिकारों को लेकर ‘पुलिसवाला न्यूज़’ के ब्यूरो चीफ मयंक श्रीवास्तव ने रायपुर सेंट्रल के नवनियुक्त DCP उमेश गुप्ता (IPS) से विशेष बातचीत की। इस चर्चा के दौरान DCP गुप्ता ने विस्तार से बताया कि अब पुलिस के पास न केवल जांच करने की शक्ति है, बल्कि उसके पास मजिस्ट्रियल (न्यायिक) अधिकार भी आ गए हैं।
DCP उमेश गुप्ता ने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत अब धारा 144 लागू करने, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई जैसे धारा 107/116 के तहत बॉन्ड ओवर कराने और अपराधियों को जेल भेजने के लिए पुलिस को अब जिला प्रशासन या कलेक्टर के आदेश का इंतज़ार नहीं करना होगा। अब पुलिस अधिकारी स्वयं इन मामलों में सुनवाई कर त्वरित निर्णय ले सकेंगे। ब्यूरो चीफ मयंक श्रीवास्तव से चर्चा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सराय एक्ट, शस्त्र लाइसेंस और शहर में किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन की अनुमति देने जैसे प्रशासनिक अधिकार भी अब सीधे पुलिस महकमे के पास होंगे, जिससे फाइलों के हस्तांतरण में लगने वाला समय बचेगा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा।
बातचीत के अंत में DCP उमेश गुप्ता ने विश्वास दिलाया कि इन विशेष अधिकारों का मुख्य उद्देश्य जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना और असामाजिक तत्वों के मन में कानून का खौफ पैदा करना है। इस नई प्रणाली से रिस्पॉन्स टाइम में सुधार होगा और अपराधियों पर नकेल कसने में पुलिस अब पहले से कहीं अधिक सक्षम और स्वतंत्र होकर कार्य करेगी।
रिपोर्ट: मयंक श्रीवास्तव

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