राधाष्टमी महोत्सव वरदान आश्रम में आज
वरदान आश्रम के संचालक भागवत रसिक पं राम गोपाल शास्त्री नीलू महाराज ने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाए जाने वाले श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के ठीक 15 दिन बाद राधा रानी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। सनातन परंपरा में श्री राधा जी को भगवान श्री कृष्ण की शक्ति माना गया है, जिनके बगैर न सिर्फ वो अधूरे हैं बल्कि उनके भक्तों की पूजा भी अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के साथ राधा जी की पूजा करने पर सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है,जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 12:06 बजे से प्रारंभ होकर 19 सितंबर को दोपहर 2:09 बजे तक रहेगी।
उदयातिथि के अनुसार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। वरदान आश्रम अंजनिया के संचालक श्री नीलू महाराज जी ने बताया की राधाजी कृष्ण की प्रियतमा हैं,वे श्रीकृष्ण के वक्षःस्थल में वास करती हैं अर्थात उनके प्राणों की अधिष्ठात्री देवी हैं। ये कृष्णवल्लभा हैं क्योंकि श्री कृष्ण को ये आनंद प्रदान करती हैं। राधा श्रीकृष्ण की आराधना करती हैं और श्री कृष्ण राधा जी की । ये दोनों परस्पर आराध्य और आराधक हैं अर्थात दोनों एक दूसरे के इष्ट देवता हैं। वरदान आश्रम में परंपरानुसार इस वर्ष भी राधा अष्टमी का पर्व वैदिक विधि के अनुसार हर्ष पूर्वक मनाया जाएगा । प्रातः काल श्रीजी के विग्रह का अभिषेक के साथ षोडशोपचर पूजन किया जाएगा एवं 56 भोग अर्पित कर प्रसादी वितरित की जाएगी ।
मंडला से अशोक मिश्रा की रिपोर्ट






