डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

प्रभारी प्राचार्य पर मनमानी, शासकीय नियमों की अनदेखी की शिकायत; डीईओ ने तत्काल मांगी जांच रिपोर्ट

शहपुरा। मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शहपुरा के प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ मनमानी, शासकीय नियमों की अनदेखी और पिछले 12-13 वर्षों के दौरान कथित रूप से फर्जी बिल-वाउचर लगाकर लाखों रुपये की हेराफेरी किए जाने की शिकायत अब जांच के दायरे में आ गई है। जिला शिक्षा अधिकारी डिंडौरी ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच प्रतिवेदन तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 12 अगस्त 2026 को जारी आदेश क्रमांक स्थापना/2026/777 के अनुसार वार्ड क्रमांक-1 शहपुरा निवासी मनीष साहू ने मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शहपुरा के प्रभारी प्राचार्य के विरुद्ध शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में प्रभारी प्राचार्य पर मनमानी, शासकीय नियमों की अवहेलना तथा विगत 12-13 वर्षों में कथित फर्जी बिल-वाउचर के माध्यम से लाखों रुपये की हेराफेरी करने के आरोप लगाए गए हैं।

संयुक्त संचालक के पत्र के बाद गठित हुई जांच समिति

मामले में संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण जबलपुर संभाग ने 11 अगस्त 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी डिंडौरी को पत्र भेजा था। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शिकायत में उल्लेखित तथ्यों की नियमानुसार जांच कराने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश जारी किया।

जांच समिति में विकासखंड शिक्षा अधिकारी शहपुरा, विकासखंड स्रोत समन्वयक जनपद शिक्षा केंद्र शहपुरा और संकुल प्राचार्य शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शहपुरा को शामिल किया गया है।

शिकायत के प्रत्येक तथ्य की जांच, तत्काल मांगा प्रतिवेदन

जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच समिति को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत में उल्लेखित तथ्यों की नियमानुसार जांच कर प्रतिवेदन तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए। ऐसे में जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं सहित अन्य आरोपों से संबंधित तथ्यों और अभिलेखों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

आदेश की प्रतिलिपि आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश भोपाल, कलेक्टर डिंडौरी और संयुक्त संचालक लोक शिक्षण जबलपुर संभाग को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

आरोपों की सच्चाई जांच के बाद होगी स्पष्ट

फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को जांच से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच समिति गठित किए जाने के बाद अब जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी। समिति की रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि 12-13 वर्षों में कथित फर्जी बिल-वाउचर के जरिए लाखों रुपये की हेराफेरी, मनमानी और शासकीय नियमों की अवहेलना संबंधी शिकायत में कितनी सत्यता है और मामले में आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता बनती है या नहीं।

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