डिंडौरी खबर 

रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप, शासन को लाखों रुपये की क्षति होने की शिकायत; जांच और एफआईआर की मांग

शहपुरा। नगर परिषद शहपुरा में मानस भवन परिसर की दुकानों के आवंटन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष राजेश गुप्ता पर शासकीय नियमों की अनदेखी कर अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने तथा शासन को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की शिकायत नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, जबलपुर संभाग के संभागीय संचालक को सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

 

शिकायत के अनुसार मानस भवन परिसर में दुकान क्रमांक 01 से 33 तक का निर्माण लगभग 90 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। इन दुकानों की नीलामी प्रक्रिया से नगर परिषद को करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। आरोप है कि इसके बाद दूसरी नीलामी प्रक्रिया के दौरान दुकान क्रमांक 34 से 41 तक के आवंटन में नियमों का पालन नहीं किया गया और तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए कुछ दुकानों का आवंटन अपने करीबी रिश्तेदारों के नाम करवा दिया।

 

शिकायतकर्ता का दावा है कि दुकान क्रमांक 36, 37, 38 एवं 39 का आवंटन पूर्व अध्यक्ष की भाभियों गायत्री गुप्ता और सरिका गुप्ता के नाम किया गया। आरोप है कि इन दुकानों को मात्र 4.50 लाख रुपये प्रति दुकान की दर से आवंटित किया गया, जबकि उसी परिसर और आसपास की दुकानों की नीलामी 20 से 35 लाख रुपये तक हुई थी। शिकायत में कहा गया है कि इस कथित अनियमितता से नगर परिषद और शासन को लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

 

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि नगर पंचायत अधिनियम के प्रावधान जनप्रतिनिधियों को अपने निकट संबंधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने से रोकते हैं। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर आवंटन किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे पद के दुरुपयोग और हितों के टकराव का मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

 

मामले में यह भी कहा गया है कि वर्तमान नगर परिषद की बैठक में संबंधित दुकानों के आवंटन को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों में असंतोष बना हुआ है।

 

शिकायत में पूर्व अध्यक्ष पर भारतीय न्याय संहिता तथा नगर पंचायत अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायत सामने आने के बाद नगर परिषद क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और अब लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

 

(नोट : यह समाचार शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एवं प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही हो सकेगी।)

 

रिपोर्ट अखिलेश झारिया 

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