डिंडौरी मध्यप्रदेश
विद्यार्थियों-बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी, पीएमजीएसवाई के तहत सर्वे पूरा लेकिन निर्माण शुरू होने का इंतजार
अमरपुर। जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत भाखा मॉल से भानपुर को जोड़ने वाली सड़क की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बारिश के चलते सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों में पानी भर गया है, जबकि कई हिस्सों में कीचड़ फैलने से आवागमन मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली विद्यार्थियों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है।
भाखा मॉल से भानपुर को जोड़ने वाला यह मार्ग ग्रामीणों के नियमित आवागमन का प्रमुख रास्ता है। प्रतिदिन विद्यार्थी, ग्रामीण, बुजुर्ग सहित दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक इस मार्ग से गुजरते हैं। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। वहीं कीचड़ के कारण दोपहिया वाहनों के फिसलने और दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक खराब सड़क के कारण वाहन चालक कई बार दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं।
बारिश में बढ़ी परेशानी, मरम्मत की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की स्थिति खराब बनी हुई है। बारिश ने समस्या को और गंभीर कर दिया है। जगह-जगह जलभराव और कीचड़ के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। स्कूली बच्चों को इसी बदहाल रास्ते से विद्यालय तक आना-जाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि नई सड़क का निर्माण शुरू होने तक मौजूदा मार्ग के गड्ढों को भरकर अस्थायी मरम्मत कराई जाए और पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश के दौरान लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
पीएमजीएसवाई से जुड़ेगा मार्ग, सर्वे पूरा
ग्राम पंचायत सरपंच के मुताबिक भाखा मॉल-भानपुर मार्ग को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) से जोड़ा गया है और सड़क निर्माण के लिए सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। अब ग्रामीणों को निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है।
ग्रामीणों का कहना है कि सर्वे पूरा होना राहत की उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन मौजूदा बदहाल सड़क पर रोजाना आवागमन करना चुनौती बना हुआ है। उन्होंने संबंधित विभाग से निर्माण की प्रक्रिया जल्द पूरी कर सड़क का काम शुरू कराने की मांग की है, ताकि भाखा मॉल और भानपुर के ग्रामीणों को वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या से स्थायी राहत मिल सके।
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
