बस्तर/रायपुर।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में सदियों से जड़ जमाए अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों और टोनही प्रताड़ना जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ डॉ. दिनेश मिश्र के नेतृत्व में एक व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। पिछले तीन दशकों से अधिक समय से जारी इस मुहिम का मुख्य ध्येय समाज को खोखला कर रही रूढ़िवादिता को मिटाना और ग्रामीणों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है। “कोई नारी टोनही नहीं होती; अंधविश्वास नहीं, वैज्ञानिक सोच अपनाएँ” के मजबूत संदेश के साथ यह अभियान बस्तर के सुदूर वनांचलों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों तक लगातार अलख जगा रहा है।
इस दीर्घकालिक अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के सुदूर गांवों में जाकर ग्रामीणों को जादू-टोना, टोनही प्रताड़ना और कथित चमत्कारों की जमीनी वास्तविकता से परिचित कराया जा रहा है। अंधविश्वास की बेड़ियों को तोड़ने के लिए कोरर, भानुप्रतापपुर, कोंडागांव, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में न केवल प्रशासनिक स्तर पर संवाद किया गया, बल्कि संवेदनशील माने जाने वाले गांवों का दौरा कर लोगों के भ्रम दूर किए गए। कांकेर जिले के पुसावंड ग्राम में स्कूली छात्रों के बीच फैले अंधविश्वास को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की पहल पर विशेष सत्र आयोजित किए गए, वहीं जगदलपुर-चित्रकूट में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के राज्य स्तरीय शिविर में युवाओं को इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूक किया गया। नारायणपुर के अत्यंत दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र के ओरछा में जनजागरण के साथ-साथ स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाकर लोगों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति पर भरोसा करना सिखाया गया।
अभियान के अंतर्गत समय-समय पर टोनही प्रताड़ना, जादू-टोने के संदेह में की जाने वाली हत्याओं और नरबलि जैसी हृदयविदारक घटनाओं के तुरंत बाद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर समझाइश दी गई है। वर्ष 2001 में नारायणपुर के खड़कागांव से शुरू हुआ यह सफर लगातार जारी है, जिसमें वर्ष 2008 में बीजापुर के जैगुर, 2013 में दंतेवाड़ा के नेलगुड़ा, 2020 में दोरनापाल के गोगुंडा और वर्ष 2025 में नारायणपुर के छोटेडोंगर जैसी जगहों पर हुई हिंसक घटनाओं के बाद सीधे ग्रामीणों से संवाद कर स्थिति को संभाला गया। इस दौरान शासकीय गुंडाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोंडागांव, शासकीय भानुप्रताप देव स्नातकोत्तर महाविद्यालय कांकेर और परचनपाल जैसे कई शिक्षण संस्थानों में व्याख्यान आयोजित कर पुस्तकों का निःशुल्क वितरण किया गया, ताकि आने वाली पीढ़ी को इस कुप्रथा से मुक्त रखा जा सके। सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाने के लिए आमदेई घाटी शिविर में जवानों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ भी इस मुहिम को जोड़ा गया, जिससे समाज के हर वर्ग तक यह संदेश प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
रिपोर्ट:मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ,पुलिसवाला न्यूज़

