स्कूल की बाउंड्री वॉल बनी मौत की दीवार! रातों-रात ताश के पत्तों की तरह गिरी, बड़ा हादसा टला
जनप्रतिनिधियों के निरीक्षण में खुली निर्माण घोटाले की परतें, ग्रामीण बोले– शिकायतों के बाद भी नहीं रुका भ्रष्टाचार
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा गुणवत्ता विहीन निर्माण? सवालों के घेरे में जिम्मेदार विभाग और ठेकेदारी व्यवस्था
जनजातीय कार्य विभाग के निर्माण कार्यों पर उठे गंभीर सवाल, जांच हुई तो खुल सकते हैं कई बड़े राज
घंसौर। जनपद पंचायत शिक्षा स्थायी समिति द्वारा पहले ही स्कूलों में कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रस्ताव पारित किया गया था। समिति ने इस संबंध में जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त, सिवनी को भी अवगत कराया था। इसके बावजूद यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं हुई और पहली ही बारिश में बाउंड्री वॉल धराशायी हो गई, तो यह पूरे निर्माण तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
हाल ही में जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती सरिता परशुराम उइके, शिक्षा समिति के अध्यक्ष राजेंद्र नामदेव, जनपद सदस्य श्रीमती संगीता भलावी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किंदरई का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि ठेकेदार द्वारा निर्मित बाउंड्री वॉल पहली ही बारिश नहीं झेल सकी और पूरी तरह ढह गई। दीवार का इस तरह गिर जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान कई बार गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी शिकायतें दी गईं, लेकिन यदि शिकायतों के बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन जाता है।
सबसे राहत की बात यह रही कि दीवार रात के समय गिरी, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। यदि यही घटना स्कूल समय में होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी ऐसी लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। शिक्षा स्थायी समिति द्वारा पहले पारित प्रस्ताव के बाद भी यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर चेतावनियों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
क्षेत्र में चर्चा है कि जिले में कुछ बड़े ठेकेदार लंबे समय से विभिन्न निर्माण कार्य कर रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या ठेकेदार के विरुद्ध संरक्षण, दबंगई या भ्रष्टाचार जैसे आरोप तब तक सिद्ध नहीं माने जा सकते जब तक सक्षम एजेंसी द्वारा उनकी जांच कर पुष्टि न हो जाए। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
अब स्थानीय नागरिक मांग कर रहे हैं कि केवल किंदरई विद्यालय की बाउंड्री वॉल ही नहीं, बल्कि जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत जिले में कराए गए अन्य निर्माण कार्यों की भी उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। यदि कहीं भी गुणवत्ता में कमी या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार, तकनीकी अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए तथा दोषियों से क्षति की भरपाई भी कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन जनता की मेहनत की कमाई है। यदि निर्माण कार्य कुछ ही महीनों में ढहने लगें तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि बच्चों की सुरक्षा के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग पर टिकी हैं कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जवाबदेह ठहराते हैं या नहीं।
