डिंडौरी मध्यप्रदेश 

सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया, पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप

डिंडौरी।: जनपद पंचायत मेंहदवानी में निर्माणाधीन थाना भवन का कार्य इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। भवन की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री, श्रमिकों की सुरक्षा और कार्य में पारदर्शिता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने कई आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस महत्वपूर्ण शासकीय भवन में शुरू से ही अनियमितताओं की आशंका दिखाई दे रही है, जिसके कारण निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग तेज हो गई है।

 

ग्रामीणों के अनुसार थाना भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन भवन की कई दीवारों में दरारें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। कुछ हिस्सों में दीवारों का निर्माण टेढ़ा-मेढ़ा नजर आ रहा है, जिससे भवन की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माणाधीन अवस्था में ही भवन की यह स्थिति है तो भविष्य में इसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं स्वाभाविक हैं।

 

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी संदेह

 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं है। रेत, सीमेंट और ईंटों की गुणवत्ता तथा उनके अनुपात को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं होने से भवन की मजबूती प्रभावित हो सकती है।

 

सुरक्षा नियमों की अनदेखी

 

निर्माण स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। मौके पर कार्यरत कई मजदूर बिना हेलमेट, ग्लव्स और अन्य सुरक्षा उपकरणों के काम करते देखे गए। ऐसे में किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि श्रम सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

 

सूचना बोर्ड नहीं, बढ़ी पारदर्शिता पर शंका

 

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड का न होना बताया जा रहा है। सामान्यतः किसी भी शासकीय निर्माण कार्य के प्रारंभ में स्थल पर सूचना बोर्ड लगाया जाता है, जिसमें परियोजना की लागत, कार्यदायी एजेंसी, ठेकेदार, कार्य अवधि तथा संबंधित अधिकारियों की जानकारी अंकित रहती है। लेकिन थाना भवन निर्माण स्थल पर ऐसा कोई बोर्ड दिखाई नहीं दे रहा है।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है, इसके बावजूद परियोजना से जुड़ी बुनियादी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे लोगों के मन में निर्माण कार्य की पारदर्शिता को लेकर संदेह गहराता जा रहा है।

 

कार्यदायी एजेंसी और ठेकेदार की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य किस एजेंसी द्वारा कराया जा रहा है और इसका ठेका किसे दिया गया है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। लोगों का मानना है कि जब शासकीय धन से निर्माण कार्य किया जा रहा है तो उससे जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक होना आवश्यक है।

 

तकनीकी जांच की मांग

 

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, स्वीकृत लागत और निर्माण प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार, कार्यदायी एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष नहीं मिला

 

इस संबंध में संबंधित विभाग और निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 

रिपोर्ट अखिलेश झारिया 

Leave A Reply

Exit mobile version