डिंडौरी/शहपुरा। नगर परिषद शहपुरा की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ने कलेक्टर डिंडौरी को एक विस्तृत आवेदन प्रस्तुत कर नगर परिषद अध्यक्ष के पति अरुण अग्रवाल तथा भारतीय जनता पार्टी मंडल अध्यक्ष एवं वार्ड क्रमांक-13 के पार्षद भजनलाल चक्रवर्ती के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदन में प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप, अनैतिक दबाव, कथित कमीशन की मांग, वित्तीय अनियमितताओं और मानसिक प्रताड़ना जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप का आरोप
सीएमओ ने कहा है कि नगर परिषद अध्यक्ष के स्थान पर उनके पति अरुण अग्रवाल परिषद के दैनिक कार्यों एवं निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। अधिकांश मामलों में अंतिम निर्णय भी उनके माध्यम से लिए जाने का आरोप लगाया गया है।
जनप्रतिनिधियों द्वारा दबाव बनाने का दावा
आवेदन के अनुसार, पार्षद एवं मंडल अध्यक्ष भजनलाल चक्रवर्ती द्वारा परिषद के निर्णय अपने निर्देशानुसार कराने का दबाव बनाया जाता था, जबकि कई मामलों में शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्वतंत्र प्रशासनिक निर्णय लेना आवश्यक होता है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई के बाद विवाद
सीएमओ का आरोप है कि बिना भवन अनुज्ञा के दो मंजिला निर्माण कार्य के संबंध में नोटिस जारी किए जाने के बाद संबंधित पक्ष नाराज हो गया और उन्हें धमकियां दी जाने लगीं।
बिना स्वीकृति खरीदी का भुगतान कराने का दबाव
आवेदन में उल्लेख है कि बिना सक्षम स्वीकृति के खरीदी गई 15 कुर्सियों के लगभग 88 हजार रुपये के बिल का भुगतान कराने के लिए दबाव बनाया गया।
स्वागत गेट प्रकरण में कथित कमीशन की मांग
सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि स्वागत गेट का प्रस्ताव उनकी पदस्थापना से पूर्व पारित हो चुका था तथा जेम पोर्टल और परिषद की स्वीकृति के बाद नियमानुसार कार्य कराया गया। इसके बावजूद संबंधित ठेकेदार से कमीशन की मांग कराने के लिए उन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।
स्वच्छ भारत मिशन के एनजीओ को लेकर आरोप
आवेदन के मुताबिक, स्वच्छता जागरूकता एवं कचरा प्रबंधन के लिए नियमानुसार नियुक्त एनजीओ से 40 प्रतिशत राशि की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने पर उसके विरुद्ध शिकायतें कराने की योजना बनाए जाने का दावा किया गया है।
कर्मचारियों और ठेकेदारों पर कथित दबाव
सीएमओ ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष पति एवं पार्षद नियमित रूप से कार्यालय में बैठकर कर्मचारियों और ठेकेदारों को बुलाते थे तथा बिना सामग्री खरीदी भुगतान प्रक्रिया पूरी करने और राशि का हिस्सा देने के लिए दबाव डालते थे।
12 लाख रुपये की सामग्री भुगतान पर सवाल
स्टोर निरीक्षण का हवाला देते हुए आवेदन में दावा किया गया है कि स्वच्छता सामग्री के नाम पर लगभग 12 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था, जबकि संबंधित सामग्री स्टोर में उपलब्ध नहीं मिली।
परिषद संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप
राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए नगर परिषद से वाहन, डीजल, चालक तथा स्वागत एवं खानपान संबंधी खर्च वहन कराने का दबाव बनाए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।
अनियमित भर्ती का आरोप
सीएमओ ने दावा किया है कि परिषद में 10 कर्मचारियों की आवश्यकता न होने के बावजूद कथित रूप से अनैतिक तरीके से भर्ती की गई तथा उनके पक्ष में प्रतिवेदन देने का दबाव डाला गया।
फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि कई फाइलें अध्यक्ष के निवास पर मंगाई जाती हैं और कथित रूप से ठेकेदारों से चर्चा के बाद ही उन पर निर्णय लिया जाता है।
नगरहित के मुद्दों की अनदेखी का दावा
निर्माणाधीन सड़क, डिवाइडर लाइट, जलप्रदाय व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दिए जाने की बात भी आवेदन में उल्लेखित है।
प्रशासक को अधिकार सौंपने की मांग
मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने कलेक्टर से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने के साथ नगर परिषद अध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रशासक को सौंपने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
इनका कहना है…
“अध्यक्ष पति सहित मंडल अध्यक्ष द्वारा दबाव बनाकर बिना कार्य के भुगतान कराने सहित अन्य मामलों से जुड़ी शिकायत कलेक्टर डिंडौरी से की है।”
— रीना राठौर, सीएमओ, नगर परिषद शहपुरा
“मैं पिछले दो महीने से नगर परिषद नहीं जा रहा हूं। सीएमओ द्वारा मेरे विरुद्ध लिखित शिकायत की गई है। मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।”
— अरुण अग्रवाल, अध्यक्ष पति, नगर परिषद शहपुरा
“मैं नगर परिषद का निर्वाचित पार्षद हूं। मैंने उनके विरुद्ध व्यक्तिगत शिकायत की है, जिसकी जांच जारी है। मेरे ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।”
— भजन लाल चक्रवर्ती, पार्षद एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष, शहपुरा
डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया







