डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

डिंडौरी/शहपुरा। पंचायतों में सरकारी राशि के इस्तेमाल और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी पर सवाल खड़े करने वाला मामला ग्राम पंचायत देवगांव के डोमदादर से सामने आया है। आरोप है कि करीब तीन-चार साल पहले पंचायत क्षेत्र में बनाए गए बाउंड्रीवॉल की गुणवत्ता ठीक नहीं होने के कारण उनका भुगतान रोक दिया गया था। अब इन्हीं पुराने निर्माण कार्यों की राशि का भुगतान दूसरे कार्य की वर्क आईडी के जरिए किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपों के मुताबिक, बाउंड्रीवॉल के भुगतान के लिए मनरेगा की पुरानी सीसी रोड निर्माण वर्क आईडी का इस्तेमाल किया गया और राशि 15वें वित्त आयोग की मद से भुगतान किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि दस्तावेजों की जांच में यह बात सही पाई जाती है, तो यह पंचायत में सरकारी राशि के उपयोग और भुगतान प्रक्रिया की गंभीर जांच का विषय होगा।

सालो पहले बने बाउंड्रीवॉल, गुणवत्ता पर सवाल और भुगतान रुका!

जानकारी के अनुसार, संबंधित बाउंड्रीवॉल का निर्माण करीब तीन-चार साल पहले कराया गया था। आरोप है कि निर्माण की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं होने के कारण इन कार्यों का भुगतान रोक दिया गया था। ऐसे में अब सवाल उठता है कि जब पुराने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति थी और भुगतान लंबित था, तो उस भुगतान को जारी करने के लिए अब कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जा रही है?
क्या बाउंड्रीवॉल की गुणवत्ता संबंधी कमियों को दूर किया गया? क्या दोबारा तकनीकी निरीक्षण हुआ? क्या सक्षम अधिकारी ने भुगतान की अनुमति दी? या फिर लंबित भुगतान को किसी दूसरे कार्य के रिकॉर्ड के जरिए निकालने का रास्ता अपनाया जा रहा है? इन सवालों का जवाब जांच और संबंधित दस्तावेजों से ही सामने आएगा।

सीसी रोड की वर्क आईडी में बाउंड्रीवॉल का भुगतान कैसे?

इस मामले का सबसे अहम पहलू मनरेगा की वित्तीय वर्ष 2021-22 की बताई जा रही वर्क आईडी 39485264 है, जिसमें एक्टिविटी का नाम सीसी रोड निर्माण दर्ज बताया गया है। आरोप है कि इसी सीसी रोड की वर्क आईडी का इस्तेमाल बाउंड्रीवॉल निर्माण की राशि के भुगतान के लिए किया गया।

यदि एक कार्य की वर्क आईडी के जरिए दूसरे कार्य का भुगतान किया गया है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसा किस आधार पर और किसकी अनुमति से किया गया। क्या सीसी रोड और बाउंड्रीवॉल के कार्यों के अलग-अलग स्वीकृति आदेश, भुगतान विवरण और माप पुस्तिकाएं मौजूद हैं? क्या भुगतान के दस्तावेजों में वास्तविक निर्माण कार्य का सही उल्लेख है? क्या 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग संबंधित नियमों और स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप हुआ?
सीसी रोड की आईडी और बाउंड्रीवॉल के भुगतान के बीच कथित संबंध ही इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।इसकी पुष्टि के लिए वर्क आईडी, भुगतान आदेश, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका और बैंक भुगतान रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है।

ठेकेदार-सचिव-सरपंच की मिलीभगत का आरोप, जांच में खुलेगा राज!

आरोप लगाए जा रहे हैं कि संबंधित ठेकेदार, पंचायत सचिव और सरपंच की मिलीभगत से पुराने बाउंड्रीवॉल के लंबित भुगतान को दूसरे कार्य की वर्क आईडी के माध्यम से जारी कराने की कोशिश की गई। हालांकि, इस कथित मिलीभगत की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों के बावजूद आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए बिना भुगतान किया गया या किसी दूसरे कार्य की आईडी का अनुचित इस्तेमाल हुआ, तो यह जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने का आधार बन सकता है। इसलिए जांच केवल भुगतान की राशि तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि भुगतान की प्रक्रिया किसने शुरू की, किसने दस्तावेज तैयार किए और किस अधिकारी ने उसे स्वीकृति दी।

सीईओ बोले— जांच कराएंगे, दोषी सरपंच पर भी होगी कार्रवाई

मामले को लेकर जनपद पंचायत शहपुरा के सीईओ गणेश पाण्डेय ने कहा कि यह मुद्दा अभी उनकी जानकारी में नहीं है और इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित पंचायत सचिव के विरुद्ध कुछ अन्य वित्तीय शिकायतें भी हैं। इन शिकायतों और वर्तमान मामले की जांच के बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सीईओ ने यह भी कहा कि यदि जांच में सरपंच दोषी पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।

सीईओ के इस बयान के बाद अब विभाग की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। यह देखना होगा कि जांच अधिकारी पुराने बाउंड्रीवॉल की गुणवत्ता, पहले रोके गए भुगतान, सीसी रोड की वर्क आईडी और 15वें वित्त आयोग की राशि के इस्तेमाल के बीच संबंधों की पड़ताल किस तरह करते हैं।

जांच में इन पांच बिंदुओं पर जवाब जरूरी

  1. सालो पहले बने बाउंड्रीवॉल का भुगतान गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों के कारण कब और किस आदेश से रोका गया था?
  2. क्या निर्माण की गुणवत्ता दोबारा जांची गई और भुगतान जारी करने की अनुमति दी गई?
  3. सीसी रोड निर्माण की वर्क आईडी क्रमांक 39485264 का बाउंड्रीवॉल के भुगतान में किस आधार पर इस्तेमाल हुआ?
  4. भुगतान किस वित्तीय मद से किया गया और संबंधित राशि किस कार्य के नाम पर जारी हुई?
  5. भुगतान की प्रक्रिया में ठेकेदार, सचिव, सरपंच और संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही?

अब देखना है— जांच होगी या फाइलों में दब जाएगा मामला?

देवगांव पंचायत का मामला केवल पुराने बाउंड्रीवॉल के भुगतान का नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, सरकारी धन के उपयोग और पंचायत स्तर पर जवाबदेही का भी है। यदि पुराने निर्माण की गुणवत्ता पर आपत्ति के कारण भुगतान रोका गया था, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि अब भुगतान की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है। वहीं, यदि दूसरे कार्य की वर्क आईडी का इस्तेमाल हुआ है, तो उसके पीछे की पूरी प्रक्रिया सामने आनी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यही है— जिस बाउंड्रीवॉल के भुगतान पर पहले गुणवत्ता को लेकर रोक लगी थी, उसकी राशि अब सीसी रोड की वर्क आईडी के जरिए क्यों और किस प्रक्रिया के तहत दी जा रही है?
अब निगाहें जनपद पंचायत की जांच पर हैं। मामले में आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जरूरी होगी। फिलहाल कथित मिलीभगत और भुगतान संबंधी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

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