डिंडौरी मध्यप्रदेश

रिपोर्ट अखिलेश झारिया

 

पांच पंचायतों की पड़ताल में सामने आई जमीनी हकीकत, निर्धारित समय में सचिव-GRS नहीं मिले; छोटे-मोटे कामों के लिए भटक रहे ग्रामीण

डिंडौरी /शहपुरा। ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान गांव में ही हो सके, इसके लिए प्रत्येक मंगलवार ग्राम पंचायत स्तर पर जनसुनवाई आयोजित किए जाने के निर्देश हैं। पंचायत भवनों के बाहर बाकायदा जनसुनवाई का दिन मंगलवार और समय सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक अंकित है, लेकिन शहपुरा जनपद क्षेत्र में जमीनी तस्वीर इन निर्देशों पर सवाल खड़े कर रही है। मंगलवार को अलग-अलग ग्राम पंचायतों की पड़ताल में कहीं पंचायत भवन बंद मिला, कहीं कार्यालय के कमरों में ताले लटके रहे तो कहीं भवन खुला होने के बावजूद जिम्मेदार कर्मचारी अपनी कुर्सियों से नदारद मिले।

 

पुलिसवाला न्यूज टीम ने मंगलवार को जनसुनवाई की वास्तविक स्थिति जानने के लिए शहपुरा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों का जायजा लिया। पड़ताल में बांकी, करौंदी, पिपरिया कला, अमठेरा और बरगांव पंचायत की स्थिति देखी गई। निर्धारित जनसुनवाई समय के दौरान अधिकांश स्थानों पर सचिव और ग्राम रोजगार सहायक मौजूद नहीं मिले। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जनसुनवाई के निर्धारित दिन और समय पर ही जिम्मेदार पंचायतकर्मी कार्यालय में नहीं मिलेंगे तो ग्रामीण अपनी समस्याएं आखिर किसके सामने रखेंगे?

 

जिला मुख्यालय से लेकर अन्य शासकीय कार्यालयों में प्रत्येक मंगलवार जनसुनवाई के माध्यम से लोगों की शिकायतें और समस्याएं सुनी जाती हैं। इसी व्यवस्था का उद्देश्य पंचायत स्तर पर भी ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करना है, ताकि उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए जनपद और जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन शहपुरा क्षेत्र की कई पंचायतों में सामने आई स्थिति इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही है।

 

बांकी: पटवारी बाहर कर रहे थे KYC, कार्यालय के कमरों में लटके थे ताले

 

दोपहर लगभग 12:15 बजे ग्राम पंचायत बांकी पहुंचने पर पंचायत परिसर का मुख्य ताला बंद नहीं मिला, लेकिन सचिव और ग्राम रोजगार सहायक मौके पर मौजूद नहीं थे। पटवारी कुछ लोगों के साथ बाहर बैठकर KYC संबंधी कार्य करते नजर आए, जबकि अंदर कार्यालय के कमरों के दरवाजों पर ताले लटके हुए थे। ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत भवन नियमित रूप से नहीं खुलने और कर्मचारियों के नहीं मिलने के कारण कई कार्यों के लिए उन्हें ब्लॉक स्तर तक जाना पड़ता है।

 

करौंदी: भवन खुला, लेकिन चपरासी के अलावा कोई नहीं

 

 

ग्राम पंचायत करौंदी का कार्यालय वर्तमान में दूसरे भवन में संचालित किया जा रहा है। मंगलवार को जनसुनवाई के निर्धारित समय में टीम वहां पहुंची तो भवन खुला मिला, लेकिन मौके पर चपरासी के अलावा पंचायत का कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं था। सचिव और ग्राम रोजगार सहायक की अनुपस्थिति के चलते जनसुनवाई जैसी कोई गतिविधि नजर नहीं आई।

 

पिपरिया कला: ताला खुला मिला, जिम्मेदारों की कुर्सियां खाली

 

ग्राम पंचायत पिपरिया कला में सुबह  लगभग 11:35 बजे पंचायत भवन का ताला तो खुला था, लेकिन अंदर जिम्मेदार कर्मचारियों की कुर्सियां खाली मिलीं। जनसुनवाई के निर्धारित समय में पंचायत के जिम्मेदार मौके पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में यहां भी ग्रामीणों की शिकायत और आवेदन लेने के लिए निर्धारित जनसुनवाई व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित होती नजर नहीं आई।

 

अमठेरा: पुराने और नए दोनों भवनों की पड़ताल, पंचायत कार्यालय मिला बंद

 

ग्राम पंचायत अमठेरा में स्थिति और गंभीर नजर आई। जनसुनवाई के निर्धारित समय पर पंचायत भवन बंद मिला और पंचायतकर्मी नदारद थे। कार्यालय के संचालन को लेकर किसी तरह की स्थिति अस्पष्ट न रहे, इसके लिए टीम ने पुराने के साथ नए पंचायत भवन की स्थिति भी देखी और दोनों स्थानों की तस्वीरें लीं। निर्धारित समय में जनसुनवाई संचालित होती नहीं मिली।

 

बरगांव: 11 बजे बंद, दोबारा पहुंचे तो मिला खुला

 

ग्राम पंचायत बरगांव में टीम सुबह करीब 11 बजे पहुंची तो पंचायत भवन में ताला लगा मिला। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे बाद 12:30 बजे दोबारा पहुंचने पर पंचायत भवन खुला मिला और ग्राम रोजगार सहायक मौके पर मौजूद मिले। यानी जनसुनवाई के लिए निर्धारित समय शुरू होने के वक्त कार्यालय बंद था, हालांकि बाद में इसे खोल दिया गया था।

 

पंचायत भवन के बाहर समय तय, फिर समय पर जिम्मेदार क्यों नहीं?

 

पंचायतों के बाहर जनसुनवाई के लिए मंगलवार सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक का समय प्रदर्शित होने के बावजूद पड़ताल के दौरान सामने आई स्थिति कई सवाल छोड़ रही है। यदि जनसुनवाई के निर्धारित समय पर सचिव और ग्राम रोजगार सहायक जैसे जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं रहेंगे तो गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और जरूरतमंद ग्रामीण अपनी समस्याएं किसे बताएंगे? क्या उन्हें छोटे-मोटे कार्यों और आवेदन देने के लिए भी जनपद मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे?

 

लगातार सामने आ रही ऐसी स्थितियां जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल खड़े करती हैं। जरूरत इस बात की है कि जनसुनवाई केवल पंचायत भवन की दीवार पर लिखे दिन और समय तक सीमित न रहे, बल्कि निर्धारित समय पर जिम्मेदार कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित हो और ग्रामीणों की शिकायतों का रिकॉर्ड रखकर उनका समयबद्ध निराकरण भी किया जाए।

 

बड़ा सवाल—जब जनसुनवाई के समय ही नहीं मिलेंगे जिम्मेदार, तो गांव में कौन सुनेगा ग्रामीणों की फरियाद?

 

शासन की मंशा ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर समाधान उपलब्ध कराने की है, लेकिन पंचायत कार्यालयों में निर्धारित समय पर जिम्मेदारों की अनुपस्थिति इस व्यवस्था के उद्देश्य को कमजोर करती नजर आ रही है। अब देखना होगा कि लगातार सामने आ रही ऐसी स्थितियों पर जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और पंचायत स्तर की जनसुनवाई व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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