शहडोल मध्य प्रदेश

5700 में गुरुजी का गला घोंट रहा सिस्टम

29 साल की सेवा और संविलियन का इंतजार
कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा पीडि़त शिक्षक का दर्द

शहडोल। भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता के दलदल में फंसा जनजातीय कार्य विभाग शहडोल, शासन के नियमों और माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को पैरों तले रौंदने में माहिर हो चुका है। ताज़ा मामला विकासखंड सोहागपुर के गोडानटोला मैकी प्राथमिक विद्यालय का है, जहां पिछले 29 वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे एक शिक्षक को विभाग के अडिय़ल रवैये ने मानसिक और आर्थिक रूप से तोडक़र रख दिया है।
5700 में परिवार का भरण-पोषण
महंगाई के इस दौर में जहाँ रसूखदार अधिकारियों के एक दिन का खर्च हजारों में है, वहीं पीडि़त शिक्षक दिलीप मिश्रा को आज भी मात्र 5700 रुपये के मानदेय पर खटाया जा रहा है। 1997 में गुरुजी के पद से सेवा शुरू करने वाले इस शिक्षक की योग्यता (बी.ए., बी.टी.आई.) होने के बावजूद उसे सहायक अध्यापक के पद पर संविलियन से वंचित रखा गया है। सवाल यह है कि क्या विभाग इन पैसों में खुद अपने परिवार पाल सकता है। यह सीधे तौर पर बंधुआ मजदूरी और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट के निर्देश भी विभाग के लिए रद्दी

पीडि़त शिक्षक ने न्याय की उम्मीद में वर्ष 2018 में माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण ली थी। कोर्ट ने 10 फरवरी 2022 को विभाग को आवश्यक कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए थे। लेकिन शहडोल का जनजातीय कार्य विभाग शायद खुद को कानून से ऊपर मानता है। सहायक आयुक्त महोदय ने न तो शिक्षक के आवेदन पर कोई निर्णय लिया और न ही उसे उच्च कार्यालय प्रेषित किया। आखिर विभाग की इस हठधर्मिता और फाइल दबाओ नीति के पीछे का राज क्या है।

नियम 2005 की आड़ में जानबूझकर अटकाया रोड़ा

शिक्षक का आरोप है कि भर्ती नियम-2005 के अनुपालन में मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेशों के बावजूद उनका संविलियन अटकाया जा रहा है। 12वीं में 50 प्रतिशत अंकों की बेतुकी शर्त का बहाना बनाया जा रहा है, जबकि नियम 2005 में गुरुजी पद के लिए ऐसी कोई बाध्यता थी ही नहीं। मूल सेवा पुस्तिका में विकासखंड शिक्षा अधिकारी सोहागपुर द्वारा समस्त योग्यताएं दर्ज किए जाने के बाद भी सहायक आयुक्त कार्यालय द्वारा कुंडली मारकर बैठना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

कलेक्टर की जनसुनवाई में आखिरी गुहार

थक-हारकर पीडि़त शिक्षक ने 17 मार्च 2026 को कलेक्टर शहडोल की जनसुनवाई में अपना दुखड़ा सुनाया। आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि अब भी न्याय नहीं मिला, तो शिक्षक को दोबारा न्यायालय की अवमानना की याचिका लगानी होगी। जनता और पीडि़त शिक्षक को अब कलेक्टर महोदय से ही आस है। क्या वे विभाग के इन शाहंशाहों पर नकेल कसेंगे या फिर एक कर्मठ शिक्षक इसी तरह व्यवस्था की बलि चढ़ जाएगा। *अजय पाल*

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