डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

चरगांव बंजर टोला मे “साफ पानी के लिए करना पड़ रहा है संघर्ष!” नल जल योजना ठप, ग्रामीण ने प्रशासन से लगाई गुहार

डिंडौरी/शहपुरा।
जनपद पंचायत शहपुरा की ग्राम पंचायत बिजोरी के पोषक ग्राम चरगांव बंजर टोला में इन दिनों प्यास की मार ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। गर्मी भले न हो, लेकिन गांव में पानी की समस्या ने आग बरसाने जैसी स्थिति पैदा कर दी है। महीनों से नल-जल योजना पूरी तरह ठप है, टंकियां सूखी पड़ी हैं और पाइपों से पानी की जगह सिर्फ हवा निकलती है। ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए झिरिया और पुराने हैंडपंपों का गंदा पानी पीना पड़ रहा है — वही पानी जिससे अब गांव में बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

“एक साल से गंदा पानी पी रहे हैं, लेकिन पंचायत सो रही है”

गांव के लोगों ने बताया कि यह स्थिति कोई दो-चार दिन की नहीं बल्कि लगभग एक साल से चली आ रही है। पंचायत सचिव और सरपंच को कई बार बताया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। ग्रामीणों का कहना है — “हमारे बच्चों को पेट दर्द, बुखार और त्वचा की समस्या हो रही है, लेकिन पंचायत के जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।”

जल जीवन मिशन बना ‘कागजों का मिशन’
सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से पानी पहुंचाना था, वह यहां सिर्फ पोस्टर और रिकॉर्ड की शोभा बनकर रह गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई, न तो सप्लाई लाइन दुरुस्त की गई और न ही नियमित निगरानी।

परेशान ग्रामीण पहुंचे एसडीएम कार्यालय, सौंपा ज्ञापन
जब हालात असहनीय हो गए तो गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने एकजुट होकर एसडीएम ऐश्वर्य वर्मा के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि अब वे सहन नहीं करेंगे, अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों का सवाल है — “क्या सरकार की योजनाएं सिर्फ शहरों के लिए हैं? क्या गांव के लोगों को शुद्ध पानी पीने का हक नहीं?”

पंचायत की चुप्पी पर उठे सवाल

गांव में पेयजल संकट ने जहां ग्रामीणों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त कर दी है, वहीं पंचायत की चुप्पी और निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। लोग कह रहे हैं कि जब पानी जैसी बुनियादी जरूरत पूरी नहीं हो पा रही, तो पंचायतों का अस्तित्व आखिर किस काम का?

अब निगाहें प्रशासन पर टिकीं

ग्रामीणों की उम्मीद अब प्रशासनिक हस्तक्षेप पर टिकी है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है और क्या चरगांव बंजर टोला के लोगों को आखिरकार शुद्ध पेयजल नसीब होगा या उन्हें अभी और प्यास से जूझना पड़ेगा।

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