डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

फटी बोरियां, कीड़े और फफूंद वाले चावल की सप्लाई का आरोप; चार साल पुराने स्टॉक के वितरण पर भी घिरा सिस्टम

डिंडौरी। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब हितग्राहियों को वितरित किए जा रहे चावल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोतवाली के सामने स्थित मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के गोदाम से शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के लिए भेजे जा रहे चावल में खराब बारदाना, कीड़े और फफूंद मिलने के आरोप सामने आए हैं। बुधवार सुबह मामला तब उजागर हुआ, जब गोदाम में चावल लोड कर रहे मजदूरों ने खराब गुणवत्ता और फटी बोरियों में चावल भेजे जाने का विरोध किया।

मजदूरों का कहना है कि गोदाम से कई बोरियां कटी-फटी हालत में दुकानों तक भेजी जा रही हैं। कमजोर बारदाने के कारण ट्रकों में लोडिंग के दौरान बोरियां फट जाती हैं और चावल जमीन पर बिखर जाता है। इससे न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

निरीक्षण में दिखे कीड़े और फफूंद

गोदाम में रखे कुछ स्टॉक के निरीक्षण के दौरान खनूजा राइस मिल द्वारा मिलिंग किए गए कुछ चावल की बोरियों में कीड़े दिखाई दिए। वहीं मां नर्मदा राइस मिल से आए कुछ स्टॉक में फफूंद लगी होने की बात सामने आई। इससे खाद्यान्न की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

चार साल पुराने स्टॉक के वितरण का दावा

जानकारी के अनुसार वर्तमान में उचित मूल्य की दुकानों को जिस चावल की आपूर्ति की जा रही है, वह वर्ष 2022 का स्टॉक बताया जा रहा है, जिसे नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के गोदामों और निजी भंडारण केंद्रों में रखा गया था। लंबे समय तक भंडारण के कारण चावल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में वितरण से पहले प्रत्येक स्टॉक की गुणवत्ता जांच आवश्यक मानी जा रही है।

हितग्राहियों के स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से यही चावल हजारों गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है। यदि खाद्यान्न में कीड़े, फफूंद अथवा अन्य गुणवत्ता संबंधी कमियां हैं, तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार अनुपयुक्त पाए जाने वाले खाद्यान्न को वितरण से पहले अलग किया जाना चाहिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसे नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।

निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

मामले ने वेयरहाउस में गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यदि अमानक चावल उचित मूल्य की दुकानों तक पहुंच रहा है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण किस स्तर पर किया जा रहा है, यह बड़ा सवाल बन गया है। जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और मजदूरों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा खराब गुणवत्ता वाले चावल की सप्लाई तत्काल रोकने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित मिलों, वेयरहाउस प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

वेयरहाउस प्रभारी का पक्ष

मामले में वेयरहाउस प्रभारी का कहना है कि जहां-जहां खराब बारदाना पाया गया है, वहां बोरियां बदली जा रही हैं। साथ ही चावल की गुणवत्ता पर भी निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, हितग्राहियों का कहना है कि यदि गुणवत्ता मानकों का सही ढंग से पालन हो रहा है, तो फिर कीड़े और फफूंद वाले चावल गोदाम तक कैसे पहुंचे और वितरण के लिए कैसे तैयार हो गए।

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