गगनयात्री शुभांशु शुक्ला ने विद्यार्थियों से किया संवाद, कहा—मेरी अंतरिक्ष यात्रा पूरे देश की यात्रा

रायपुर।छत्तीसगढ़ का भविष्य नई प्रेरक ऊर्जा से भरा हुआ है। यहां के बच्चों में अपार प्रतिभा, जिज्ञासा और सीखने की तीव्र इच्छा है। यह बात गगनयात्री श्री शुभांशु शुक्ला ने जिला प्रशासन रायपुर के प्रोजेक्ट अंतरिक्ष संगवारी के तहत ग्राम राखी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल में विद्यार्थियों से संवाद के दौरान कही।
श्री शुक्ला ने “राम-राम छत्तीसगढ़” के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए विद्यार्थियों के जिज्ञासापूर्ण और रोचक प्रश्नों के सहजता से उत्तर दिए। उन्होंने स्मरण कराया कि 5 सितंबर 2025 को भी उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से छत्तीसगढ़ के बच्चों से संवाद किया था, जहां बच्चों के सवालों ने उनकी जिज्ञासा और सीखने की ललक को दर्शाया था।
संवाद के दौरान कक्षा नवमीं की छात्रा किरण भास्कर ने चंद्रमा पर कदम रखने वाली भारत की प्रथम नागरिक बनने का सपना साझा किया। इस पर श्री शुक्ला ने उसकी सराहना करते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करना, सेहत का ध्यान रखना, अनुशासन और निरंतर प्रयास से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।
कॉमर्स संकाय की छात्रा काजल साहू ने बड़े सपने देखने और मेहनत व किस्मत की भूमिका को लेकर प्रश्न किया। श्री शुक्ला ने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है, किस्मत भी मेहनत से ही बनती है। उन्होंने काजल की हिचक दूर करते हुए उसे सहज महसूस कराया और मन से सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया, जिससे दोनों के बीच एक प्रेरक संवाद देखने को मिला।
मैकेनिकल इंजीनियर प्रीति मंडल के मानसिक तैयारी से जुड़े प्रश्न पर श्री शुक्ला ने निरंतरता, मानसिक मजबूती और विपरीत परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने को आवश्यक बताया। वहीं, एस्ट्रोनॉट बनने के पहले कदम के रूप में अनुशासन को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए पढ़ाई और खेलों के बीच संतुलन पर भी जोर दिया।
पर्यावरण संरक्षण पर बात करते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि पृथ्वी बेहद सुंदर है और टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ते हुए पर्यावरण संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
अपनी अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे भारत की यात्रा थी। उन्होंने 320 परिक्रमा में लगभग 1.4 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की और प्रतीकात्मक रूप से हर भारतवासी के हिस्से का 100 मीटर सफर पूरा किया। इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज भारत का बच्चा एस्ट्रोनॉट बनने का सपना देखने लगा है।
इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट अंतरिक्ष संगवारी एक पहल नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो युवाओं के सपनों को आकाश से आगे अंतरिक्ष तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत रायपुर जिले के 300 से अधिक स्कूलों में विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी दी जा चुकी है।
कार्यक्रम में निगम आयुक्त श्री विश्वदीप, जिला शिक्षा अधिकारी श्री हिमांशु भारती, आईडीवायएम के अध्यक्ष व सह-संस्थापक श्री रत्नेश मिश्रा, हेड ऑफिसर शिव सिंह भदोरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रिपोर्ट: प्रवीण शर्मा

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