शहडोल मध्य प्रदेश
कल्याणपुर पंचायत में जल-कर घोटाले का खेल: पानी गायब, पैसे भी लापता!
शहडोल। सोहागपुर जनपद की ग्राम पंचायत कल्याणपुर इन दिनों भ्रष्टाचार, लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। हर घर जल योजना के नाम पर विकास के दावे करने वाली पंचायत की हकीकत यह है कि यहां के करीब 3200 ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं, जबकि उनसे नियमित रूप से जल-कर वसूला जा रहा है।
वसूली जारी, सुविधा ठप
पंचायत में 785 नल कनेक्शन दर्ज हैं और प्रत्येक से 50 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से जल-कर वसूला जाता है। यानी हर महीने हजारों रुपये पंचायत के खाते में पहुंचने चाहिए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि विद्युत विभाग का करीब 6 लाख रुपये का बकाया खड़ा है, जिसके चलते बिजली आपूर्ति ठप हो चुकी है। परिणामस्वरूप नल-जल योजना पूरी तरह बंद पड़ी है और गांव अंधेरे में डूबा हुआ है।
जनता ठगी, जिम्मेदार बेपरवाह
ग्रामीणों का आरोप है कि उनसे वसूले जा रहे कर का उपयोग न तो जलापूर्ति बहाल करने में हो रहा है और न ही बिजली बिल चुकाने में। इससे पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं और रात के समय गांव में असुरक्षा का माहौल बन गया है।
बयान से बढ़ा विवाद
स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधि ने कथित तौर पर यह कह दिया कि “हमारे घर के पास लाइट है, तो क्या हम अकेले बिल भरें?” यह बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि जनप्रतिनिधि की भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है।
बंद नलों पर बंट रहा वेतन
हैरत की बात यह है कि नल संचालन के लिए पंचायत द्वारा एक कर्मचारी को प्रतिदिन 250 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जबकि महीनों से पानी की सप्लाई बंद है। यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का मामला प्रतीत होता है।
कानून की अनदेखी, कार्रवाई कब?
मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के अनुसार कर से प्राप्त राशि का उपयोग जनसुविधाओं के लिए करना अनिवार्य है। इसके बावजूद यदि धन का दुरुपयोग हो रहा है, तो यह गंभीर अनियमितता है। सवाल यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी आखिर कब तक आंख मूंदे रहेंगे?
फूट रहा ग्रामीणों का गुस्सा
पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों में अब आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं हुई और स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक चुप्पी साधे रहता है या कोई ठोस कार्रवाई करता है।
अजय पाल
