डिंडौरी मध्यप्रदेश
शहपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पारदर्शिता पर सवाल, नियमों की अनदेखी कर निर्माण कराने के आरोप
शहपुरा। डिंडोरी जिले के शहपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में करोड़ों रुपए की लागत से बनाए जा रहे 50 सीटर अस्पताल भवन का निर्माण कार्य अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने से पूरे मामले में पारदर्शिता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया है।
जानकारी के अनुसार किसी भी शासकीय निर्माण कार्य के प्रारंभ होने से पहले निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य होता है। इस बोर्ड में निर्माण कार्य की कुल लागत, स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार का नाम, संबंधित विभागीय अधिकारियों की जानकारी, कार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि सहित अन्य आवश्यक जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती हैं, ताकि आम जनता को यह जानकारी मिल सके कि किस योजना के तहत कितना खर्च किया जा रहा है।
लेकिन शहपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करोड़ों रुपए की लागत से अस्पताल भवन का निर्माण कार्य जारी होने के बावजूद अब तक सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य में संभावित अनियमितताओं और गुणवत्ता संबंधी खामियों को छिपाने के लिए जानबूझकर सूचना सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत कराया जा रहा है तो फिर सूचना बोर्ड लगाने में आखिर परहेज क्यों किया जा रहा है। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पहले से ही निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता को लेकर संदेह बना हुआ है, वहीं बिना सूचना बोर्ड के कार्य कराया जाना शासन के नियमों की सीधी अनदेखी है।
ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले में मौन बने हुए हैं, जिससे ठेकेदार को मनमानी करने का अवसर मिल रहा है। लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं विभागीय संरक्षण में नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य तो नहीं कराया जा रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य में जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर जनता को उससे जुड़ी मूलभूत जानकारी से दूर क्यों रखा जा रहा है। आखिर बिना सूचना बोर्ड के निर्माण कार्य किसके आदेश और संरक्षण में कराया जा रहा है?
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण स्थल पर तत्काल सूचना बोर्ड लगाए जाने तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में यह मामला बड़े भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का उदाहरण बन सकता है।
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

