कटनी
कटनी जिले में इन दिनों गेहूं खरीदी और भंडारण व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। किसानों की मेहनत से उपजा अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ा है और सायलो बैग व्यवस्था अब विवादों का केंद्र बन चुकी है। जिले के कई खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था इतनी बढ़ चुकी है कि किसान घंटों नहीं बल्कि कई-कई दिनों तक अपनी ट्रॉलियां लेकर इंतजार करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस पूरे “सायलो बैग खेल” का मास्टरमाइंड कौन है?आखिर क्यों ऐसी व्यवस्था लागू की गई जिसमें किसानों को राहत मिलने के बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है? इन सबके बीच कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला का नाम लगातार चर्चाओं में बना हुआ है और लोग खुलकर सवाल उठाने लगे हैं।जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रही तस्वीरें प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही हैं। कहीं गेहूं खुले में भीग रहा है तो कहीं ट्रकों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। किसान आरोप लगा रहे हैं कि सही तरीके से भंडारण और परिवहन की व्यवस्था नहीं होने के कारण खरीदी केंद्रों में अराजकता फैल गई है। किसानों का कहना है कि पहले उन्हें समर्थन मूल्य पर खरीदी की उम्मीद थी, लेकिन अब हालत यह हो गई है कि खरीदी के बाद भी उनका गेहूं समय पर नहीं उठ रहा। कई किसानों ने आरोप लगाया कि सायलो बैग व्यवस्था के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की गई और जमीन पर कोई ठोस तैयारी नहीं दिखी। सूत्रों की मानें तो सायलो बैगों की संख्या, गुणवत्ता और उपयोग को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर किस आधार पर यह व्यवस्था लागू की गई? क्या संबंधित अधिकारियों ने पहले से जमीन की स्थिति, मौसम और भंडारण क्षमता का आकलन किया था या नहीं? यदि किया था तो फिर ऐसी अव्यवस्था क्यों सामने आई? इन सवालों के बीच कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय किसानों और व्यापारियों के बीच यह चर्चा आम है कि खरीदी और भंडारण व्यवस्था की निगरानी में भारी लापरवाही बरती गई। कई किसानों का आरोप है कि अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है।उनका कहना है कि यदि समय रहते परिवहन और भंडारण की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो हजारों क्विंटल गेहूं खराब हो सकता है। किसानों को डर है कि बारिश या नमी के कारण उनकी उपज की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इसका नुकसान अंततः उन्हें ही झेलना पड़ेगा। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि खरीदी केंद्रों में कर्मचारियों और किसानों के बीच विवाद की नौबत तक आ रही है। किसान आरोप लगा रहे हैं कि कई जगहों पर मनमानी तरीके से गेहूं रिजेक्ट किया जा रहा है। कहीं मिट्टी का बहाना बनाया जा रहा है तो कहीं नमी का। इससे किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जिले में चर्चा यह भी है कि यदि समय पर पर्याप्त गोदाम और परिवहन व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी तो आखिर इतनी बड़ी मात्रा में खरीदी का लक्ष्य क्यों तय किया गया? क्या केवल आंकड़ों का खेल दिखाने के लिए किसानों को संकट में धकेला गया?सायलो बैग व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित भंडारण का विकल्प बताया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत दिखाई दे रही है। कई केंद्रों में बैग सही तरीके से नहीं लगाए गए, सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रही और निगरानी का अभाव साफ नजर आया। इससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ईमानदारी से काम करता तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में व्यवस्था दुरुस्त दिखाने में लगे रहे, जबकि जमीन पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कब होगी? क्या प्रशासन सायलो बैग व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय करेगा? क्या कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पीयूष शुक्ला सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा? कटनी जिले के किसान अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि कार्रवाई चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन की स्थिति बन सकती है। किसान संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि यदि खरीदी, परिवहन और भंडारण की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
कटनी का यह सायलो बैग मामला अब केवल अव्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और किसानों के विश्वास का सवाल बन चुका है। किसानों की मेहनत से उपजा अन्न यदि सही तरीके से सुरक्षित नहीं रखा जा सका तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि व्यवस्था की बड़ी विफलता मानी जाएगी।
पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट
